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दस फीसदी क्षैतिज आरक्षण समाप्त करने पर जताई नाराजगी
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लोहाघाट (चंपावत)। चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार की ओर से सरकारी सेवा में दस फीसदी क्षैतिज आरक्षण को समाप्त करने पर नाराजगी जताई है।
रविवार को नगर के रामलीला मैदान में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी नवीन मुरारी की अध्यक्षता और राजेंद्र गड़कोटी के संचालन में हुई बैठक में आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार की ओर से सरकारी नौकरियों में राज्य आंदोलनकारियों को देने वाले आरक्षण को निरस्त करने के निर्णय को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
उनका कहना है कि सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका दायर क्यों नहीं की। उनका आरोप है कि सरकार की घोर उपेक्षा के चलते राज्य आंदोलनकारियों को सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करनी पड़ी।
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए थे। सरकार पर आंदोलनकारियों की घोर उपेक्षा हुई है। सरकारों की लापरवाही और उदासीनता के कारण आरक्षण का प्रावधान एक झटके में निरस्त कर दिया गया।
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उनका कहना था कि मुजफ्फरनगर कांड के मुकदमे पर राज्य आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार अपना दायित्व निभाने में फेल रही। सरकार आंदोलनकारियों के खिलाफ फैसले ले रही है, जो आंदोलनकारियों का अपमान है। इस मौके पर पदमादत्त पुनेठा, भगीरथ भट्ट, डा.बृजेश माहरा, नवीन खर्कवाल, सुरेश ढेक, अर्जुन ढेक, पूरन उप्रेती आदि ने विचार रखे।
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रविवार को नगर के रामलीला मैदान में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी नवीन मुरारी की अध्यक्षता और राजेंद्र गड़कोटी के संचालन में हुई बैठक में आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार की ओर से सरकारी नौकरियों में राज्य आंदोलनकारियों को देने वाले आरक्षण को निरस्त करने के निर्णय को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
उनका कहना है कि सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका दायर क्यों नहीं की। उनका आरोप है कि सरकार की घोर उपेक्षा के चलते राज्य आंदोलनकारियों को सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करनी पड़ी।
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इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए थे। सरकार पर आंदोलनकारियों की घोर उपेक्षा हुई है। सरकारों की लापरवाही और उदासीनता के कारण आरक्षण का प्रावधान एक झटके में निरस्त कर दिया गया।
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उनका कहना था कि मुजफ्फरनगर कांड के मुकदमे पर राज्य आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार अपना दायित्व निभाने में फेल रही। सरकार आंदोलनकारियों के खिलाफ फैसले ले रही है, जो आंदोलनकारियों का अपमान है। इस मौके पर पदमादत्त पुनेठा, भगीरथ भट्ट, डा.बृजेश माहरा, नवीन खर्कवाल, सुरेश ढेक, अर्जुन ढेक, पूरन उप्रेती आदि ने विचार रखे।