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जल स्तर गिरने के साथ ही विद्युत उत्पादन घटा
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बनबसा (चंपावत)। शारदा नदी का जलस्तर कम होने का असर एनएचपीसी और लोहियाहेड पावर हाउस के विद्युत उत्पादन पर पड़ रहा है। पानी की कमी के चलते दोनों बिजली घरों का उत्पादन कम होने लगा है। अब जून से नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ही दोनों बिजलीघरों में फिर से उत्पादन बढ़ेगा।
यूपी सिंचाई विभाग के शारदा हेडवर्क्स के बैराज अटेंडेंट जगदीश श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार को नदी का जलस्तर 5122 क्यूसेक है। बताया कि जनवरी, फरवरी में नदी का जलस्तर और भी कम हो सकता है। एनएचपीसी के टनकपुर पावर हाउस की क्षमता 120 मेगावाट की है। तीन टरबाइनों वाले पावर हाउस की तीनों टरबाइनों को घुमाने के लिए नदी में कम से कम 18000 क्यूसेक पानी की जरूरत पड़ती है, लेकिन नदी का जलस्तर कम होने से इन दिनों एक टरबाइन चलाकर 24 से 25 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है।
बता दें कि लोहियाहेड पावर हाउस में बिजली बनाने की अधिकतम क्षमता 39 मेगावाट है। इन दिनों नदी में कम पानी के कारण वहां 18 से 20 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ बृजेश कुमार मौर्य ने बताया कि अब नदी का जलस्तर मई के बाद बर्फ पिघलने पर ही धीरे-धीरे बढ़ेगा।
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यूपी सिंचाई विभाग के शारदा हेडवर्क्स के बैराज अटेंडेंट जगदीश श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार को नदी का जलस्तर 5122 क्यूसेक है। बताया कि जनवरी, फरवरी में नदी का जलस्तर और भी कम हो सकता है। एनएचपीसी के टनकपुर पावर हाउस की क्षमता 120 मेगावाट की है। तीन टरबाइनों वाले पावर हाउस की तीनों टरबाइनों को घुमाने के लिए नदी में कम से कम 18000 क्यूसेक पानी की जरूरत पड़ती है, लेकिन नदी का जलस्तर कम होने से इन दिनों एक टरबाइन चलाकर 24 से 25 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है।
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बता दें कि लोहियाहेड पावर हाउस में बिजली बनाने की अधिकतम क्षमता 39 मेगावाट है। इन दिनों नदी में कम पानी के कारण वहां 18 से 20 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ बृजेश कुमार मौर्य ने बताया कि अब नदी का जलस्तर मई के बाद बर्फ पिघलने पर ही धीरे-धीरे बढ़ेगा।
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