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भांग और अफीम की खेती के दुष्प्रभाव बताए

Thu, 29 Jun 2017 10:39 PM IST
Updated Thu, 29 Jun 2017 10:39 PM IST
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भांग और अफीम की खेती के दुष्प्रभाव बताए
चंपावत। तहसील सभागार में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के नेतृत्व में आयोजित एक दिनी कार्यशाला में राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधियों को भांग और अफीम की खेती के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि भांग और अफीम की खेती गैर कानूनी एवं दंडनीय अपराध है।
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उन्होंने बताया कि एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा आठ के अनुसार कोई भी व्यक्ति अफीम अथवा भांग की खेती, व्यापार और तस्करी नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद भांग की खेती करने वाले व्यक्तियों और किसानों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने कार्यशाला में मौजूद ग्राम प्रधानों को राजस्व विभाग के कर्मचारियों के सहयोग से भांग की खेती को नष्ट करने की अपील की। उन्होंने बताया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 46 के अनुसार प्रत्येक किसान का यह कर्तव्य है कि यदि उसकी जमीन या खेत पर गैरकानूनी तरीके से भांग की खेती होती है तो शीघ्र इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाने या कंट्रोल ब्यूरो को देे।
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यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उसके लिए सजा का प्रावधान है। इस दौरान हरीश चंद्र जोशी, शंकर लाल वर्मा, राजेंद्र कुमार, दीपक चतुर्वेदी, पुष्कर नाथ, सुरजीत मेहता, नारायण लाल, हरीश राम, पुष्कर सिंह, ममता बिष्ट आदि मौजूद रहे।

तस्करी करते पाए जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के सब जोनल यूनिट देहरादून के धर्मेंद्र सिंह के अनुसार एनडीपीएस एक्ट की धारा 18 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अफीम और गांजे की खेती, व्यापार अथवा तस्करी करते हुए पाया जाता है तो उसे 10 से 20 साल की सजा का प्रावधान है, जबकि धारा 31 (ए) के तहत उसे मृत्युदंड का भी प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि धारा 47 के तहत सरकारी कर्मचारियों, पंच, सरपंच आदि का यह कर्तव्य है कि गैर कानूनी खेती की सूचना पुलिस को या कंट्रोल ब्यूरो को दें, ऐसा न किए जाने पर उनके लिए भी सजा का प्रावधान है।

पूर्व में शर्तों के आधार पर होती थी भांग की खेती

अलग उत्तराखंड राज्य बनने से पूर्व एकीकृत उत्तर प्रदेश के समय में पर्वतीय क्षेत्र में भांग की खेती को शर्तों के आधार मंजूरी दी गई थी। काश्तकार देवेंद्र ओली के अनुसार यूपी के समय में लोहाघाट के तत्कालीन एसडीएम की पहल पर पहाड़ पर भांग की रस्सी का कुटीर उद्योग होने तथा अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में शरीर को गर्म रखने के लिए प्रयोग किए जाने की शर्तों पर भांग की खेती को मंजूरी प्रदान की गई थी।

मादक पदार्थों से बचने के लिए जागरूक किया

पुलिस और फायर सर्विस ने संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को आपदा, मादक पदार्थों से बचने और महिला हेल्प लाइन की जानकारी दी। थानाध्यक्ष राजेश पांडेय ने ग्रामीणों को ड्रग निवारण सप्ताह के अंतर्गत मादक पदार्थों से होने वाले नुकसान और बचाव की जानकारी दी।

उन्होंने गांव में मादक पदार्थों के सेवन या अवैध रूप से बेचे जाने के संबंध में पुलिस को अवगत कराने की अपील की। उन्होंने महिला हेल्पलाइन 1090 के संबंध में जानकारी देते हुए किसी भी समस्या से अवगत कराने को कहा। फायर सर्विस के मदन सिंह ने ग्रामीणों को आपदा प्रबंधन की जानकारी दी। इस मौके पर एसआई देवेंद्र सामंत, लीड फायर मैन प्रकाश चंद्र पांडेय, ग्रामप्रधान मीना देवी, पूर्व प्रधान प्रकाश चंद्र आदि ने सहयोग दिया।
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