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जिम कार्बेट का इतिहास जानने हंगरी से पहुंचे विक्टर और थामस
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जिले में प्रसिद्ध अंग्रेज शिकारी जिम कार्बेट से जुड़े स्थलों का इतिहास जानने के लिए हंगरी देश के दो शोधार्थी एक माह के पर्यटन वीजा पर आए हैं। हंगरी से आए विक्टर करूथेन और थामस फिलर जिले के उन स्थानों का भ्रमण कर जानकारियां जुटाएंगे, जहां जिम कार्बेट की ऐतिहासिक स्मृतियां जुड़ी हैं। अब तक उन्होंने सीमांत चूका, कलढूंगा और गौड़ी क्षेत्र का जायजा लिया है।
पड़ोसी मुल्क नेपाल से लगे सीमावर्ती मंच-तामली क्षेत्र में प्रसिद्ध अंग्रेज शिकारी जिम कार्बेट को आज भी बड़ी शिद्दत से याद किया जाता है। अतीत में कुमाऊं क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने कई आदमखोर बाघों को अपने अचूक निशाने से ढेर करने वाले जिम कार्बेट को चंपावत जिले के सीमांत क्षेत्र से बेहद गहरा लगाव था। मंच क्षेत्र में स्थित वन विभाग के डाक बंगले में अंग्रेज अधिकारियों के अलावा प्रसिद्ध शिकारी जिम कार्बेट ने भी कई-कई दिनों तक प्रवास किया था।
हंगरी से आए विक्टर और थामस का कहना है कि वह जिम कार्बेट के जीवन पर एक किताब लिख रहे हैं। उनका कहना है कि चंपावत का सीमावर्ती क्षेत्र जिम कार्बेट की कर्मस्थली रहा था। वर्ष 1940 में दुबड़जैनल नामक स्थान पर ही जिम कार्बेट ने आतंक का पर्याय बन चुकी नरभक्षी बाघिन का सफाया कर स्थानीय लोगों को राहत दी थी।
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मंच में स्थित वन विभाग के डाक बंगले में आज भी जिम कार्बेट से जुड़ी अतीत की कई स्मृतियां मौजूद हैं। कार्बेट ने उस दौर में नीड़, बोयल, गुरखोली, ठूलाकोट, ल्वारगी, बकोड़ा, सोराई आदि गांवों में नरभक्षी बन चुके बाघों को मौत के घाट उतारा था।
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पड़ोसी मुल्क नेपाल से लगे सीमावर्ती मंच-तामली क्षेत्र में प्रसिद्ध अंग्रेज शिकारी जिम कार्बेट को आज भी बड़ी शिद्दत से याद किया जाता है। अतीत में कुमाऊं क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने कई आदमखोर बाघों को अपने अचूक निशाने से ढेर करने वाले जिम कार्बेट को चंपावत जिले के सीमांत क्षेत्र से बेहद गहरा लगाव था। मंच क्षेत्र में स्थित वन विभाग के डाक बंगले में अंग्रेज अधिकारियों के अलावा प्रसिद्ध शिकारी जिम कार्बेट ने भी कई-कई दिनों तक प्रवास किया था।
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हंगरी से आए विक्टर और थामस का कहना है कि वह जिम कार्बेट के जीवन पर एक किताब लिख रहे हैं। उनका कहना है कि चंपावत का सीमावर्ती क्षेत्र जिम कार्बेट की कर्मस्थली रहा था। वर्ष 1940 में दुबड़जैनल नामक स्थान पर ही जिम कार्बेट ने आतंक का पर्याय बन चुकी नरभक्षी बाघिन का सफाया कर स्थानीय लोगों को राहत दी थी।
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मंच में स्थित वन विभाग के डाक बंगले में आज भी जिम कार्बेट से जुड़ी अतीत की कई स्मृतियां मौजूद हैं। कार्बेट ने उस दौर में नीड़, बोयल, गुरखोली, ठूलाकोट, ल्वारगी, बकोड़ा, सोराई आदि गांवों में नरभक्षी बन चुके बाघों को मौत के घाट उतारा था।