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नसबंदी के तीन साल बाद गर्भवती हुई महिला
Updated Tue, 02 Jan 2018 10:13 PM IST
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चंपावत। वर्ष 2015 में नसबंदी कराने के तीन साल बाद एक महिला गर्भवती हो गई। महिला और उनके पति ने इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजे की मांग की है।
जिला मुख्यालय से करीब 34 किलोमीटर दूर चंपावत विकासखंड की दुधौरी ग्राम पंचायत के दिवान राम (61) का कहना है कि उनकी पत्नी नीला देवी (57) ने 2015 मेें जिला अस्पताल में लगे शिविर में नसबंदी कराई थी। पिछले साल उनकी पत्नी गर्भवती हो गई।
उन्होंने दुधौरी के पूर्व ग्राम प्रधान भीम सिंह से शिकायत की। मंगलवार को दिवान राम पूर्व प्रधान को साथ लेकर मुख्यालय आए और विभाग को पत्र भेज नसबंदी में लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि उनके पहले से ही तीन बच्चे हैं। ग्रामीण दिवान राम ने स्वास्थ्य विभाग से मुआवजे की मांग की है।
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बता दें कि महिला की नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 90 दिनों के भीतर स्वास्थ्य विभाग को सूचना दिए जाने पर 30 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता हैै। ऐसे मामलों में जिले में अब तक दो लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है।
नसबंदी में प्रयुक्त बैंड कभी-कभार अपने आप खुल जाती है। जिस कारण गर्भ ठहर जाता है। इस बात का उल्लेख सहमति पत्र में भी किया जाता है। नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 90 दिन के भीतर सूचना स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी है। इसके बाद गर्भपात की प्रक्रिया की जाती है।
- डॉ. एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
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जिला मुख्यालय से करीब 34 किलोमीटर दूर चंपावत विकासखंड की दुधौरी ग्राम पंचायत के दिवान राम (61) का कहना है कि उनकी पत्नी नीला देवी (57) ने 2015 मेें जिला अस्पताल में लगे शिविर में नसबंदी कराई थी। पिछले साल उनकी पत्नी गर्भवती हो गई।
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उन्होंने दुधौरी के पूर्व ग्राम प्रधान भीम सिंह से शिकायत की। मंगलवार को दिवान राम पूर्व प्रधान को साथ लेकर मुख्यालय आए और विभाग को पत्र भेज नसबंदी में लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि उनके पहले से ही तीन बच्चे हैं। ग्रामीण दिवान राम ने स्वास्थ्य विभाग से मुआवजे की मांग की है।
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बता दें कि महिला की नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 90 दिनों के भीतर स्वास्थ्य विभाग को सूचना दिए जाने पर 30 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता हैै। ऐसे मामलों में जिले में अब तक दो लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है।
नसबंदी में प्रयुक्त बैंड कभी-कभार अपने आप खुल जाती है। जिस कारण गर्भ ठहर जाता है। इस बात का उल्लेख सहमति पत्र में भी किया जाता है। नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 90 दिन के भीतर सूचना स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी है। इसके बाद गर्भपात की प्रक्रिया की जाती है।
- डॉ. एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।