फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   उम्मीद के किसान

उम्मीद के किसान

Mon, 19 Jun 2017 11:07 PM IST
Updated Mon, 19 Jun 2017 11:07 PM IST
विज्ञापन
उम्मीद के किसान
उम्मीद के किसान ...
विज्ञापन

चंपावत। देश में कर्ज की समस्या से परेशान किसान आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। पिथौरागढ़ जिले के बेड़ीनाग में भी एक किसान कर्ज न चुका पाने पर मौत को गले लगा चुका है। दूसरी तरफ, ऐसे भी कुछ किसान हैं जिन्होंने अपनी सोच और हौसले से खेती-किसानी को खुशहाली का साधन बना लिया है। चंपावत जिले के ऐसे ही कुछ किसानों ने परंपरागत खेती के स्थान पर बेमौसमी सब्जी उत्पादन को अपना कर किसानों के लिए नजीर पेश की है। इनके देखादेखी दूसरे किसान भी परंपरागत खेती के स्थान पर बेमौसमी सब्जियों की खेती को तवज्जो देने लगे हैं।
जिला मुख्यालय के समीपवर्ती ढकना बडोला ग्राम पंचायत निवासी विक्रम सिंह भंडारी और पाटी ब्लॉक के मनोज भट्ट ने बेमौसमी सब्जी उत्पादन को अपनी आजीविका का जरिया बनाया है। दोनों ही किसानों को समय-समय पर प्रगतिशील किसान के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। पाटी के मनोज तो बेमौसमी सब्जियों के अलावा फूलों की खेती भी करते हैं, जिनकी बिक्री दिल्ली, बंगलूरू जैसे महानगरों में की जाती है। दोनों किसान वर्ष भर में कई प्रकार की सब्जियों का उत्पादन कर करीब साढ़े तीन से चार लाख रुपये कमा लेते हैं। इन प्रगतिशील किसानों का कहना है कि लंबे समय पर खेतों से एक ही प्रकार की फसलों, सब्जियों का उत्पादन संभव नहीं है। ऐसे में अन्य किसानों को भी खेती की तकनीक बदलनी चाहिए।
विज्ञापन

बेमौसमी सब्जियां ले आईं जीवन में खुशहाली
ढकना के विक्रम सिंह, पाटी के मनोज भट्ट ने पेश की मिसाल
दोनों किसानों को मिल चुका है प्रगतिशील किसान का पुरस्कार

चंपावत। प्रगतिशील किसान विक्रम सिंह, मनोज भट्ट बताते हैं कि उन्हें बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन की प्रेरणा कृषि विज्ञान केंद्र सुंई के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन से मिली। बताते हैं कि पहले वह भी परंपरागत खेती करते थे। कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन पर उन्होंने बेमौसमी सब्जियों की खेती करने का फैसला लिया। इसके लिए उन्होंने पॉलीहाउस लगाकर खेती करनी शुरू कर दी। अब वह बेमौसम में टमाटर, मटर, शिमला मिर्च, प्याज, फूल, पत्ता गोभी, हरी मिर्च, मूली के साथ ही मेथी, पालक आदि हरी सब्जियां भी उगाते हैं। इसकी बिक्री स्थानीय बाजारों में करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


चंपावत। मनोज भट्ट के अनुसार जब उन्होंने फूलों की खेती शुरू की तो उत्पादित फूलों का विपणन करना उनके सामने बड़ी चुनौती थी। स्थानीय बाजार में उन्हें इसके वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे थे। उन्होंने विपणन के लिए मदर डेयरी से नाता जोड़ा। अब वह उगाए गए फूलों की विभिन्न प्रजातियों को मदर डेयरी के माध्यम से दिल्ली, बंगलूरू जैसे महानगरों को भेजते हैं।

चंपावत। प्रगतिशील किसान विक्रम सिंह बताते हैं कि गांवों में चकबंदी प्रक्रिया लागू न होने से लघु, मझोले किसानों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पर्वतीय क्षेत्र में खेत बिखरे होने के कारण किसानों को एकमुश्त जमीन नहीं मिल पाती है, जबकि बेमौसमी सब्जियों, फसलों के उत्पादन के लिए एक साथ ज्यादा खेतों की जरूरत होती है।


चंपावत। जिला मुख्यालय से सटे कई गांवों ने सब्जी उत्पादक गांवों के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप हरी सब्जियों के उत्पादन के लिए पुनेठी, तिलोन, भरछाना, तल्ली लमाई, मल्ली लमाई, चौड़ा, राजपुरा, मझेड़ा, मानेश्वर, खूनाबोरा, गौड़ी गांव विशेष पहचान रखते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed