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Chamoli News: महिलाएं करेंगी सब्जी उत्पादन नाली भूमि पर
Sat, 16 May 2026 04:57 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 16 May 2026 04:57 PM IST
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स्थानीय बाजार और आईटीबीपी में बिकेगा उत्पाद, रीप कर रहा है महिलाओं का प्रोत्साहन
दीपक कुमार
कर्णप्रयाग। विकासखंड के नौली में दो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 16 महिलाएं 50 नाली भूमि पर सब्जी उत्पादन करेंगी। ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) इस पहल में महिलाओं का सहयोग कर रही है, जिसका उद्देश्य उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।
रीप के आजीविका समन्वयक ताजबर सिंह फर्रस्वाण ने बताया कि सब्जी उत्पादन मल्चिंग विधि और ड्रिप इरिगेशन सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा। मल्चिंग विधि में फसलों के आसपास की मिट्टी को प्लास्टिक शीट या अन्य सामग्री से ढका जाता है। यह मिट्टी की नमी बनाए रखने, खरपतवार रोकने और उपज बढ़ाने में सहायक है। ड्रिप इरिगेशन सिस्टम पानी और उर्वरक को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाता है। यह तकनीक पारंपरिक सिंचाई की तुलना में 70 फीसदी तक पानी बचाती है और पैदावार में 30 से 40 फीसदी की वृद्धि करती है।
जंगली जानवरों से सब्जियों की सुरक्षा के लिए भूमि के चारों ओर चेन लिंक फेंसिंग भी की जाएगी। महिलाएं टमाटर, भिंडी, शिमला मिर्च, बीन्स और बैंगन जैसी सब्जियां उगाएंगी। उत्पादित सब्जियों को स्थानीय बाजार और आईटीबीपी में बेचा जाएगा। रीप के जिला परियोजना प्रबंधक शशिकांत यादव ने कहा कि सब्जी उत्पादन आय का एक बेहतर स्रोत है।
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स्थानीय बाजार और आईटीबीपी में बिकेगा उत्पाद, रीप कर रहा है महिलाओं का प्रोत्साहन
दीपक कुमार
कर्णप्रयाग। विकासखंड के नौली में दो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 16 महिलाएं 50 नाली भूमि पर सब्जी उत्पादन करेंगी। ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) इस पहल में महिलाओं का सहयोग कर रही है, जिसका उद्देश्य उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।
रीप के आजीविका समन्वयक ताजबर सिंह फर्रस्वाण ने बताया कि सब्जी उत्पादन मल्चिंग विधि और ड्रिप इरिगेशन सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा। मल्चिंग विधि में फसलों के आसपास की मिट्टी को प्लास्टिक शीट या अन्य सामग्री से ढका जाता है। यह मिट्टी की नमी बनाए रखने, खरपतवार रोकने और उपज बढ़ाने में सहायक है। ड्रिप इरिगेशन सिस्टम पानी और उर्वरक को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाता है। यह तकनीक पारंपरिक सिंचाई की तुलना में 70 फीसदी तक पानी बचाती है और पैदावार में 30 से 40 फीसदी की वृद्धि करती है।
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जंगली जानवरों से सब्जियों की सुरक्षा के लिए भूमि के चारों ओर चेन लिंक फेंसिंग भी की जाएगी। महिलाएं टमाटर, भिंडी, शिमला मिर्च, बीन्स और बैंगन जैसी सब्जियां उगाएंगी। उत्पादित सब्जियों को स्थानीय बाजार और आईटीबीपी में बेचा जाएगा। रीप के जिला परियोजना प्रबंधक शशिकांत यादव ने कहा कि सब्जी उत्पादन आय का एक बेहतर स्रोत है।
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