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‘एक किमी के लिए नहीं देंगे तीस मीटर सड़क’
थराली
Updated Sat, 28 Nov 2015 09:47 PM IST
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परखाल-केदारकोट से चोपता को जोड़ने वाली एक किमी सड़क पर रैंस और चोपता के ग्रामीणों के विवाद को हल करने के लिए कई अधिकारी कार्यस्थल पर गए। लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया। शुक्रवार को एसडीएम गैरसैंण केएस नेगी, तहसीलदार थराली परमानंद राम, नायब तहसीलदार एससी बौंठियाल पहुंचे।
रैंस के ग्राम प्रधान रजनी देवी और ग्रामीणों के साथ हुई प्रशासनिक अधिकारियों की वार्ता के बाद रैंस के ग्रामीणों ने साफ मना करते हुए कहा कि वे चोपता गांव के लिए बनने वाली लोक निर्माण विभाग की एक किमी सड़क के लिए अपनी 30 मीटर भूमि नहीं देंगे। वार्ता में पूर्व प्रधान अवतार सिंह, आनंद सिंह, इंद्र सिंह, बचन सिंह, मुन्ना सिंह, सुपिया लाल आदि थे। इस सड़क में 30 मीटर भूमि रैंस गांव के अधीन है। इसी 30 मीटर सड़क पर पिछले आठ सालों से विवाद बना हुआ है। हालांकि, 970 मीटर सड़क का निर्माण हो चुका है। लेकिन इस 30 मीटर पर कटिंग न होने से चोपता सहित लोदला और तुनेड़ा गांव तक सड़क का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। इस विवाद का हल निकालने के लिए तहसील प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और रेंस व चोपता के ग्रामीणों के बीच कई बार बातचीत हो गई है। लेकिन अभी तक इस मोटर मार्ग के विवाद का हल नहीं निकल पाया है। तहसीलदार परमानंद राम ने कहा कि इस विवादित मोटर मार्ग का मुआवजा देने के लिए वे रैंस गांव भी गए थे। लेकिन रैंस के ग्रामीणों ने मुआवजा लेने से भी मना कर दिया।
चोपता गांव तक सड़क निर्माण को पूरा करने के लिए चोपता, लोदला और तुनेड़ा के ग्रामीणों का तहसील पर 11वें दिन भी धरना जारी रहा। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में इस मोटर मार्ग के निर्माण कार्य करने पर अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा गया था। तब किसी ने मना नहीं किया था लेकिन अब कुछ लोग बेवजह इसमें विवाद खड़ा कर रहे हैं। धरने में बैठने वालों में बलबीर सिंह, नेगी, मोहन सिंह रावत, गब्बर सिंह रावत, हिम्मत सिंह,चंद्र सिंह, सोबन सिंह, स्वरूप सिंह, राजेंद्र सिंह, विरेंद्र सिंह रावत, भगत सिंह, दिगपाल सिंह, अनूसूया प्रसाद सती, जयानंद सती, पूर्व प्रधान कमलालाल, उम्मेद सिंह रावत, बालम सिंह, धीरेंद्र सिंह रावत आदि थे।
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रैंस के ग्राम प्रधान रजनी देवी और ग्रामीणों के साथ हुई प्रशासनिक अधिकारियों की वार्ता के बाद रैंस के ग्रामीणों ने साफ मना करते हुए कहा कि वे चोपता गांव के लिए बनने वाली लोक निर्माण विभाग की एक किमी सड़क के लिए अपनी 30 मीटर भूमि नहीं देंगे। वार्ता में पूर्व प्रधान अवतार सिंह, आनंद सिंह, इंद्र सिंह, बचन सिंह, मुन्ना सिंह, सुपिया लाल आदि थे। इस सड़क में 30 मीटर भूमि रैंस गांव के अधीन है। इसी 30 मीटर सड़क पर पिछले आठ सालों से विवाद बना हुआ है। हालांकि, 970 मीटर सड़क का निर्माण हो चुका है। लेकिन इस 30 मीटर पर कटिंग न होने से चोपता सहित लोदला और तुनेड़ा गांव तक सड़क का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। इस विवाद का हल निकालने के लिए तहसील प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और रेंस व चोपता के ग्रामीणों के बीच कई बार बातचीत हो गई है। लेकिन अभी तक इस मोटर मार्ग के विवाद का हल नहीं निकल पाया है। तहसीलदार परमानंद राम ने कहा कि इस विवादित मोटर मार्ग का मुआवजा देने के लिए वे रैंस गांव भी गए थे। लेकिन रैंस के ग्रामीणों ने मुआवजा लेने से भी मना कर दिया।
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चोपता गांव तक सड़क निर्माण को पूरा करने के लिए चोपता, लोदला और तुनेड़ा के ग्रामीणों का तहसील पर 11वें दिन भी धरना जारी रहा। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में इस मोटर मार्ग के निर्माण कार्य करने पर अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा गया था। तब किसी ने मना नहीं किया था लेकिन अब कुछ लोग बेवजह इसमें विवाद खड़ा कर रहे हैं। धरने में बैठने वालों में बलबीर सिंह, नेगी, मोहन सिंह रावत, गब्बर सिंह रावत, हिम्मत सिंह,चंद्र सिंह, सोबन सिंह, स्वरूप सिंह, राजेंद्र सिंह, विरेंद्र सिंह रावत, भगत सिंह, दिगपाल सिंह, अनूसूया प्रसाद सती, जयानंद सती, पूर्व प्रधान कमलालाल, उम्मेद सिंह रावत, बालम सिंह, धीरेंद्र सिंह रावत आदि थे।
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