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Chamoli News: जब नाश मनुज पर आता है पहले विवेक मर जाता है...
Thu, 24 Apr 2025 07:48 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Thu, 24 Apr 2025 07:48 PM IST
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पीजी कॉलेज में पुण्य तिथि पर याद किए गए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 51वीं पुण्य तिथि पर काव्य पाठ किया गया। दिनकर की कविताओं जब नाश मनुज पर आता है पहले विवेक मर जाता है... के जरिये उन्हें याद किया गया।
पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में अमीषा ने ‘रह जाता कोई अर्थ नहीं’, विकास ने ‘रश्मिरथी’, मयंक व प्रीति ने ‘कलम या कि तलवार’, संजना ने गगन का चांद, कृष्णा ने पुर्जे की खराबी जैसी रचनाओं के माध्यम से दिनकर के जीवन पर प्रकाश डाला। प्राध्यापक डॉ. चंद्रेश जोगेला ने रामधारी सिंह दिनकर के साहित्य क्षेत्र में योगदान को बताया। वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. अमित कुमार जायसवाल ने कहा कि दिनकर की कविताएं समाज में चेतना और जागरूकता पैदा करने वाली हैं। उन्होंने दिनकर की कविताएं सिंहासन खाली करो कि जनता आती है..., महाभारत में पांडवों के अज्ञातवास के बाद जब पांडवों की तरफ से श्रीकृष्ण कौरवों के पास संधि का प्रस्ताव लेकर जाते हैं, विकास ने वर्षों तक वन में घूम घूम, बाधा विघ्नों को चूम चूम... जब नाश मनुज पर आता है पहले विवेक मर जाता है’ जैसी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में बीएड विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रावती जोशी, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अखिलेश कुकरेती, डॉ. एसएल बटियाटा, डॉ. विधि ढौंडियाल और डॉ. सबल कुमार सैनी आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 51वीं पुण्य तिथि पर काव्य पाठ किया गया। दिनकर की कविताओं जब नाश मनुज पर आता है पहले विवेक मर जाता है... के जरिये उन्हें याद किया गया।
पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में अमीषा ने ‘रह जाता कोई अर्थ नहीं’, विकास ने ‘रश्मिरथी’, मयंक व प्रीति ने ‘कलम या कि तलवार’, संजना ने गगन का चांद, कृष्णा ने पुर्जे की खराबी जैसी रचनाओं के माध्यम से दिनकर के जीवन पर प्रकाश डाला। प्राध्यापक डॉ. चंद्रेश जोगेला ने रामधारी सिंह दिनकर के साहित्य क्षेत्र में योगदान को बताया। वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. अमित कुमार जायसवाल ने कहा कि दिनकर की कविताएं समाज में चेतना और जागरूकता पैदा करने वाली हैं। उन्होंने दिनकर की कविताएं सिंहासन खाली करो कि जनता आती है..., महाभारत में पांडवों के अज्ञातवास के बाद जब पांडवों की तरफ से श्रीकृष्ण कौरवों के पास संधि का प्रस्ताव लेकर जाते हैं, विकास ने वर्षों तक वन में घूम घूम, बाधा विघ्नों को चूम चूम... जब नाश मनुज पर आता है पहले विवेक मर जाता है’ जैसी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में बीएड विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रावती जोशी, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अखिलेश कुकरेती, डॉ. एसएल बटियाटा, डॉ. विधि ढौंडियाल और डॉ. सबल कुमार सैनी आदि मौजूद रहे।
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