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Chamoli News: मकानों में घुसा पानी, लोग सामान समेटकर भागे
Wed, 23 Aug 2023 05:38 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Wed, 23 Aug 2023 05:38 PM IST
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फोटो
मूसलाधार बारिश के कारण उफान पर बही पिंडर और प्राणमति नदी
ग्वालदम में स्टेट हाईवे का 200 मीटर हिस्सा नदी में समा
सूना और थराली के ग्रामीणों की ओर बनाई गई अस्थायी पुलिया बही
संवाद न्यूज एजेंसी
थराली। मूसलाधार बारिश के कारण पिंडर नदी उफान पर बहने से थराली में 20 से अधिक मकान सहित दुकानों, स्कूल और मंदिर में पानी भर गया। जैसे ही पिंडर नदी का पानी मकानों में घुसने लगा लोग सामान समेटकर भागने लगे। पुलिस और तहसील प्रशासन ने सायरन बजाकर नदी किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा। दूसरी ओर प्राणमति नदी में उफान से सूना और थराली के ग्रामीणों की ओर बनाई गई अस्थायी पुलिया भी बह गई। वहीं ग्वालदम में स्टेट हाईवे का 200 मीटर हिस्सा भी नदी में समा गया।
प्राणमति नदी के कटाव से देवकूना और थराली गांव कई हेक्टेयर कृषि भूमि नष्ट हो गई। नदी का रुख थराली गांव और देकुना गांव की तरफ होने से दोनों गांवों को खतरा बना है। वहीं पिंडर और प्राणमति नदी के उफान के कारण कर्णप्रयाग-ग्वालदम मार्ग का कुछ हिस्सा सिमलसैंण में नदी में धंस गया। सिमलसैंण गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है और गांव खतरे की जद में आया गया है। नदी के कटाव से थराली-देवाल सड़क ग्वालदम तिराहे से स्टेट हाईवे का 200 मीटर हिस्सा भी नदी में समा गया है। यहां पर सड़क की चौड़ाई दो मीटर से भी कम रह गई है। वहीं एसडीएम रविंद्र जुवांठा ने कहा कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। लोगों को फिलहाल नदी किनारे बने आवासों से दूर रहने को कहा गया है। आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेकर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाएगा।
रतगांव में ही कैद होकर रह गई पांच हजार की आबादी
गांव जाने वाले रास्ते हैं टूटे, खाद्यान्न और दवाइयों की भी कमी होने लगी
रमेश चंद्र जोशी
थराली। रतगांव क्षेत्र में आपदा आए 10 दिन हो गए हैं लेकिन शासन-प्रशासन का कोई भी अधिकारी अभी तक यहां के लोगों की स्थिति जानने के लिए नहीं पहुंचा। गांव में स्थिति यह है कि रतगांव जाने के लिए रास्ता नहीं बचा है। गांव की पांच हजार की आबादी गांवों में ही कैद होकर रह गई है। अब रतगांव में खाद्यान्न और दवाइयों की किल्लत हो गई है। बिजली सप्लाई भी दो सप्ताह से बंद है। कुछ लोग सोलर प्लेट से मोबाइल चार्ज कर गांव की स्थिति बयां कर रहे हैं।
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बीते 13 अगस्त की रात को हुई मूसलाधार बारिश से प्राणमति नदी में बाढ़ आने से रतगांव को जोड़ने वाला एकमात्र वैली ब्रिज बह गया उसके बाद से रतगांव का संपर्क कटा हुआ है। 16 अगस्त को प्रशासन और डीडीआरएफ की टीम दस किमी पैदल चलकर ढाढरबगड़ पहुंची लेकिन पुल नहीं होने से रतगांव को दो किमी दूर से ही देखकर लौट गई। वहीं थराली डुंग्री और डुंग्री रतगांव मार्ग क्षतिग्रस्त होने से यहां बैली ब्रिज बनाने के लिए सामग्री भी नहीं पहुंचाई जा सकती है। साथ ही रतगांव में कई महिलाएं ऐसी हैं जिनका एक माह में प्रसव होना है। वहीं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी का कहना है कि रतगांव को जोड़ने के लिए बैलीब्रिज का सामान थराली पहुंच गया है। सड़क ठीक होने पर पुल निर्माण की सामग्री कार्यस्थल तक पहुंचाकर पुल निर्माण का शुरू किया जाएगा। आपातस्थिति में गर्भवती एवं बीमार लोगों का हेली से लिफ्ट किया जाएगा। बशर्ते मौसम साफ हो। संवाद
मलबा आने से कर्णप्रयाग-रानीखेत हाईवे एक घंटे बंद रहा
आदिबदरी। कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे उज्वलपुर के नजदीक दो बार नाला उफान पर आने से एक घंटे तक बंद रहा। सूचना मिलते ही लोनिवि की जेसीबी मौके पर पहुंची और सड़क से मलबा हटाकर यातायात सुचारु कराया। इस स्थान पर लगातार पानी के साथ मलबा आ रहा है। हल्की बारिश में भी यहां सड़क बंद हो जा रही है। लोनिवि के अवसर अभियंता डीएस चौहान ने कहा कि मौके पर जेसीबी तैनात की गई है। संवाद
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मूसलाधार बारिश के कारण उफान पर बही पिंडर और प्राणमति नदी
ग्वालदम में स्टेट हाईवे का 200 मीटर हिस्सा नदी में समा
सूना और थराली के ग्रामीणों की ओर बनाई गई अस्थायी पुलिया बही
संवाद न्यूज एजेंसी
थराली। मूसलाधार बारिश के कारण पिंडर नदी उफान पर बहने से थराली में 20 से अधिक मकान सहित दुकानों, स्कूल और मंदिर में पानी भर गया। जैसे ही पिंडर नदी का पानी मकानों में घुसने लगा लोग सामान समेटकर भागने लगे। पुलिस और तहसील प्रशासन ने सायरन बजाकर नदी किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा। दूसरी ओर प्राणमति नदी में उफान से सूना और थराली के ग्रामीणों की ओर बनाई गई अस्थायी पुलिया भी बह गई। वहीं ग्वालदम में स्टेट हाईवे का 200 मीटर हिस्सा भी नदी में समा गया।
प्राणमति नदी के कटाव से देवकूना और थराली गांव कई हेक्टेयर कृषि भूमि नष्ट हो गई। नदी का रुख थराली गांव और देकुना गांव की तरफ होने से दोनों गांवों को खतरा बना है। वहीं पिंडर और प्राणमति नदी के उफान के कारण कर्णप्रयाग-ग्वालदम मार्ग का कुछ हिस्सा सिमलसैंण में नदी में धंस गया। सिमलसैंण गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है और गांव खतरे की जद में आया गया है। नदी के कटाव से थराली-देवाल सड़क ग्वालदम तिराहे से स्टेट हाईवे का 200 मीटर हिस्सा भी नदी में समा गया है। यहां पर सड़क की चौड़ाई दो मीटर से भी कम रह गई है। वहीं एसडीएम रविंद्र जुवांठा ने कहा कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। लोगों को फिलहाल नदी किनारे बने आवासों से दूर रहने को कहा गया है। आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेकर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाएगा।
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रतगांव में ही कैद होकर रह गई पांच हजार की आबादी
गांव जाने वाले रास्ते हैं टूटे, खाद्यान्न और दवाइयों की भी कमी होने लगी
रमेश चंद्र जोशी
थराली। रतगांव क्षेत्र में आपदा आए 10 दिन हो गए हैं लेकिन शासन-प्रशासन का कोई भी अधिकारी अभी तक यहां के लोगों की स्थिति जानने के लिए नहीं पहुंचा। गांव में स्थिति यह है कि रतगांव जाने के लिए रास्ता नहीं बचा है। गांव की पांच हजार की आबादी गांवों में ही कैद होकर रह गई है। अब रतगांव में खाद्यान्न और दवाइयों की किल्लत हो गई है। बिजली सप्लाई भी दो सप्ताह से बंद है। कुछ लोग सोलर प्लेट से मोबाइल चार्ज कर गांव की स्थिति बयां कर रहे हैं।
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बीते 13 अगस्त की रात को हुई मूसलाधार बारिश से प्राणमति नदी में बाढ़ आने से रतगांव को जोड़ने वाला एकमात्र वैली ब्रिज बह गया उसके बाद से रतगांव का संपर्क कटा हुआ है। 16 अगस्त को प्रशासन और डीडीआरएफ की टीम दस किमी पैदल चलकर ढाढरबगड़ पहुंची लेकिन पुल नहीं होने से रतगांव को दो किमी दूर से ही देखकर लौट गई। वहीं थराली डुंग्री और डुंग्री रतगांव मार्ग क्षतिग्रस्त होने से यहां बैली ब्रिज बनाने के लिए सामग्री भी नहीं पहुंचाई जा सकती है। साथ ही रतगांव में कई महिलाएं ऐसी हैं जिनका एक माह में प्रसव होना है। वहीं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी का कहना है कि रतगांव को जोड़ने के लिए बैलीब्रिज का सामान थराली पहुंच गया है। सड़क ठीक होने पर पुल निर्माण की सामग्री कार्यस्थल तक पहुंचाकर पुल निर्माण का शुरू किया जाएगा। आपातस्थिति में गर्भवती एवं बीमार लोगों का हेली से लिफ्ट किया जाएगा। बशर्ते मौसम साफ हो। संवाद
मलबा आने से कर्णप्रयाग-रानीखेत हाईवे एक घंटे बंद रहा
आदिबदरी। कर्णप्रयाग-नैनीताल हाईवे उज्वलपुर के नजदीक दो बार नाला उफान पर आने से एक घंटे तक बंद रहा। सूचना मिलते ही लोनिवि की जेसीबी मौके पर पहुंची और सड़क से मलबा हटाकर यातायात सुचारु कराया। इस स्थान पर लगातार पानी के साथ मलबा आ रहा है। हल्की बारिश में भी यहां सड़क बंद हो जा रही है। लोनिवि के अवसर अभियंता डीएस चौहान ने कहा कि मौके पर जेसीबी तैनात की गई है। संवाद