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सड़क के लिए ग्वालदम और चिडंगा के ग्रामीणों का प्रदर्शन
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ग्वालदम और चिडंगा के ग्रामीणों ने शनिवार को ग्वालदम-खंपाधार-चिडंगा मल्ला मोटरमार्ग पर डामरीकरण की मांग को लेकर ग्वालदम-थराली-चिडंगा तिराहे पर प्रदर्शन किया। ग्वालदम के प्रधान हीरा बोरा और ज्येष्ठ प्रमुख महावीर शाह के नेतृत्व में कई ग्रामीणों ने सरकार के विरोध में नारेबाजी की।
गुस्साए लोगों ने कहा कि 8 साल बाद भी उनके गांव की सड़क बदहाल है। इस सड़क से ग्वालदम और चिडंगा मल्ला के 4 हजार से अधिक लोग व देवाल घाटी के 60 और थराली के 20 गांव कुमाऊं मंडल से जुड़ते हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हर बार यह सड़क पहला चुनावी मुद्दा होती है लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई जिक्र तक नहीं करता। यदि छह माह में इस सड़क पर कार्य शुरू नहीं हुआ तो ग्वालदम और चिड़ंगा के लोग आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। इस संबध में दोनों गांव के प्रधानों ने प्रस्ताव भी पारित किया। विरोध प्रदर्शन करने वालों में हीरा सिंह, जेष्ठ प्रमुख महावीर शाह, क्षेपंस गजेंद्र रावल, हरीश जोशी, हरेंद्र बिष्ट, मीनू टम्टा, गंगा सिंह, बीरेंद्र सिंह, रमेश परिहार, गंगादत शर्मा, धीरेंद्र शाह शामिल थे।
नहीं सुधारी दशा, लगाया आवागमन प्रतिबंध का बोर्ड
चिडंगा मल्ला एवं तल्ला ग्वालदम की चार हजार से अधिक आबादी को सड़क से जोड़ने के लिए 2013 में स्पेशल कपाेंनेंट प्लान के तहत लोनिवि थराली ने 7 किमी ग्वालदम-खंपाधार-चिडंगा मल्ला मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू किया था। अब आठ साल बाद निर्माण करने के स्थान पर लोक निर्माण विभाग थराली ने इस पर आवागमन प्रतिबंध का बोर्ड लगा दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार विभाग और क्षेत्रीय विधायक के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह और तीरथ रावत से मिलकर सड़क के सुधारीकरण की गुहार लगा चुके हैं लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। अब अंतिम विकल्प आंदोलन रह गया है।
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गुस्साए लोगों ने कहा कि 8 साल बाद भी उनके गांव की सड़क बदहाल है। इस सड़क से ग्वालदम और चिडंगा मल्ला के 4 हजार से अधिक लोग व देवाल घाटी के 60 और थराली के 20 गांव कुमाऊं मंडल से जुड़ते हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हर बार यह सड़क पहला चुनावी मुद्दा होती है लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई जिक्र तक नहीं करता। यदि छह माह में इस सड़क पर कार्य शुरू नहीं हुआ तो ग्वालदम और चिड़ंगा के लोग आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। इस संबध में दोनों गांव के प्रधानों ने प्रस्ताव भी पारित किया। विरोध प्रदर्शन करने वालों में हीरा सिंह, जेष्ठ प्रमुख महावीर शाह, क्षेपंस गजेंद्र रावल, हरीश जोशी, हरेंद्र बिष्ट, मीनू टम्टा, गंगा सिंह, बीरेंद्र सिंह, रमेश परिहार, गंगादत शर्मा, धीरेंद्र शाह शामिल थे।
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नहीं सुधारी दशा, लगाया आवागमन प्रतिबंध का बोर्ड
चिडंगा मल्ला एवं तल्ला ग्वालदम की चार हजार से अधिक आबादी को सड़क से जोड़ने के लिए 2013 में स्पेशल कपाेंनेंट प्लान के तहत लोनिवि थराली ने 7 किमी ग्वालदम-खंपाधार-चिडंगा मल्ला मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू किया था। अब आठ साल बाद निर्माण करने के स्थान पर लोक निर्माण विभाग थराली ने इस पर आवागमन प्रतिबंध का बोर्ड लगा दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार विभाग और क्षेत्रीय विधायक के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह और तीरथ रावत से मिलकर सड़क के सुधारीकरण की गुहार लगा चुके हैं लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। अब अंतिम विकल्प आंदोलन रह गया है।
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