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Chamoli News: पर्यटकों के लिए खुली फूलों की घाटी
Mon, 01 Jun 2026 06:15 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Mon, 01 Jun 2026 06:15 PM IST
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पूजा-अर्चना के बाद खोला गया गेट, पहले दिन 108 पर्यटक पहुंचे घाटी
घाटी में इस समय खिले 24 से अधिक प्रजाति के फूल
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। विश्व धरोहर फूलों की घाटी सोमवार को पर्यटकों के लिए खोल दी गई। वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने हरी झंडी दिखाकर घाटी के लिए पहला दल रवाना किया। पहले दिन घाटी में 108 पर्यटक पहुंचे। घाटी में इस समय 24 से अधिक प्रजाति के फूल खिल चुके हैं।
फूलों की घाटी हर साल एक जून को पर्यटकों के लिए खोली जाती है और 31 अक्तूबर को बंद की जाती है। सोमवार को घांघरिया में स्थित नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की टीम ने पूजा अर्चना के बाद गेट का ताला खोला। वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि सोमवार को घाटी में 108 पर्यटक पहुंचे। इनमें 70 पुरुष, 11 महिलाएं, 24 स्कूली बच्चे व तीन अन्य शामिल रहे। पर्यटकों को घाटी के बारे में भी जानकारी दी गई। फूलों के खिलने का समय, विभिन्न प्रजाति के फूलों के नाम सहित घाटी के इतिहास को भी बताया गया। चेतना कांडपाल ने बताया कि पहली बार 1931 में फ्रेंक स्माइथ ने इसकी खोज की थी। वे वर्ष 1937 में फिर यहां आए और फूलों की घाटी नाम से पुस्तक प्रकाशित की। 1982 में इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया और इसे नंदा देवी बायोस्फियर का कोर जोन बनाया गया। वर्ष 2005 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया। उन्होंने बताया कि जुलाई से अगस्त माह के बीच यहां सर्वाधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं। इसमें ब्रह्मकमल, ब्लू पोस्ता, कोबरा लिली जैसे दुर्लभ प्रजाति के फूल शामिल हैं। इस दौरान वन विभाग के कर्मचारी व स्थानीय लोग मौजूद रहे।
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पूजा-अर्चना के बाद खोला गया गेट, पहले दिन 108 पर्यटक पहुंचे घाटी
घाटी में इस समय खिले 24 से अधिक प्रजाति के फूल
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। विश्व धरोहर फूलों की घाटी सोमवार को पर्यटकों के लिए खोल दी गई। वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने हरी झंडी दिखाकर घाटी के लिए पहला दल रवाना किया। पहले दिन घाटी में 108 पर्यटक पहुंचे। घाटी में इस समय 24 से अधिक प्रजाति के फूल खिल चुके हैं।
फूलों की घाटी हर साल एक जून को पर्यटकों के लिए खोली जाती है और 31 अक्तूबर को बंद की जाती है। सोमवार को घांघरिया में स्थित नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की टीम ने पूजा अर्चना के बाद गेट का ताला खोला। वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि सोमवार को घाटी में 108 पर्यटक पहुंचे। इनमें 70 पुरुष, 11 महिलाएं, 24 स्कूली बच्चे व तीन अन्य शामिल रहे। पर्यटकों को घाटी के बारे में भी जानकारी दी गई। फूलों के खिलने का समय, विभिन्न प्रजाति के फूलों के नाम सहित घाटी के इतिहास को भी बताया गया। चेतना कांडपाल ने बताया कि पहली बार 1931 में फ्रेंक स्माइथ ने इसकी खोज की थी। वे वर्ष 1937 में फिर यहां आए और फूलों की घाटी नाम से पुस्तक प्रकाशित की। 1982 में इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया और इसे नंदा देवी बायोस्फियर का कोर जोन बनाया गया। वर्ष 2005 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया। उन्होंने बताया कि जुलाई से अगस्त माह के बीच यहां सर्वाधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं। इसमें ब्रह्मकमल, ब्लू पोस्ता, कोबरा लिली जैसे दुर्लभ प्रजाति के फूल शामिल हैं। इस दौरान वन विभाग के कर्मचारी व स्थानीय लोग मौजूद रहे।
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