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उक्रांद ने सरकार के विरोध में तहसील में दिया धरना
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सरकार से गुस्साए उक्रांद नेताओं ने तहसील में दो घंटे धरना दिया। दरअसल अंकिता हत्याकांड और भर्ती घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर वह प्रधानमंत्री से मिलने बदरीनाथ जा रहे थे। उन्हें पुलिस ने गौचर में ही रोक दिया और आगे नहीं जाने दिया। रोष स्वरूप उक्रांद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
दोपहर 12 बजे उक्रांद के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आनंद प्रकाश जुयाल, श्रमिक संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट, केंद्रीय मीडिया प्रभारी मोहित डिमरी, जिलाध्यक्ष बुद्धिबल्लभ ममंगाई, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष भगत चौहान व अर्जुन रावत ने बताया कि वह प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने जा रहे थे।
ज्ञापन में उन्होंने मांग की कि यमकेश्वर विधायक रेनू बिष्ट, पुलकित आर्य के पिता और भाई को जांच के दायरे में लाया जाए। उत्तराखंड में रजिॉर्ट पॉलिसी बनाई जाए। हरेक रिजॉर्ट 25 प्रतिशत हिस्सेदारी स्थानीय लोगों व 25 प्रतिशत जिले के मूल निवासियों की हो। साथ ही शसक्त भूकानून और मूल निवास कानून बनाया जाए।
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उक्रांद कार्यकर्ता प्रधानमंत्री को अपनी मांगों का ज्ञापन देने जा रहे थे। सभी पीएम से मिलें ये संभव नहीं है। इसलिए उन्हें रोककर प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन देने को कहा गया। तहसील में ज्ञापन देकर उक्रांद नेता वापस चले गए हैं। किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है। - संतोष कुमार पांडेय, एसडीएम कर्णप्रयाग।
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दोपहर 12 बजे उक्रांद के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आनंद प्रकाश जुयाल, श्रमिक संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट, केंद्रीय मीडिया प्रभारी मोहित डिमरी, जिलाध्यक्ष बुद्धिबल्लभ ममंगाई, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष भगत चौहान व अर्जुन रावत ने बताया कि वह प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने जा रहे थे।
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ज्ञापन में उन्होंने मांग की कि यमकेश्वर विधायक रेनू बिष्ट, पुलकित आर्य के पिता और भाई को जांच के दायरे में लाया जाए। उत्तराखंड में रजिॉर्ट पॉलिसी बनाई जाए। हरेक रिजॉर्ट 25 प्रतिशत हिस्सेदारी स्थानीय लोगों व 25 प्रतिशत जिले के मूल निवासियों की हो। साथ ही शसक्त भूकानून और मूल निवास कानून बनाया जाए।
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उक्रांद कार्यकर्ता प्रधानमंत्री को अपनी मांगों का ज्ञापन देने जा रहे थे। सभी पीएम से मिलें ये संभव नहीं है। इसलिए उन्हें रोककर प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन देने को कहा गया। तहसील में ज्ञापन देकर उक्रांद नेता वापस चले गए हैं। किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है। - संतोष कुमार पांडेय, एसडीएम कर्णप्रयाग।