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सात दिन के भ्यूंडार-गमशाली ट्रेक को तीन दिन में किया पार
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भ्यूंडार ट्रेक पर ट्रेकिंग करते स्थानीय युवा।
- फोटो : GOPESHWAR
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सात दिन के भ्यूंडार-गमशाली ट्रेक को तीन दिन में किया पार
जोशीमठ के दो ट्रकरों ने रिकॉर्ड समय में किया इसे पार
ट्रेक पर तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों पर जताई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
जोशीमठ। जोशीमठ निवासी माउंटेन टैक्स (ट्रेकर कंपनी) के राहुल मेहता और हाइका द हिमालय के अमन मेहता ने 5100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भ्यूंडार-गमशाली ट्रेक को तीन दिन के रिकार्ड समय में पूरा कर लिया। जबकि अति दुर्गम इस ट्रेक को पार करने में सामान्य तौर पर छह से सात दिन लगते हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में ग्लेशियरों की स्थिति चिंताजनक है। यहां ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
राहुल और अमन ने बताया कि करीब 60 किमी लंबे इस ट्रेक को फूलों की घाटी से शुरू किया जाता है और पिटरा खर्क, भ्यूंडार आइसफाल, भ्यूंडार खाल, रतावन जैसे स्थलों से होकर गमशाली गांव पहुंचा जाता है। पूरे ट्रेक पर बर्फ होने के कारण कड़ाके की ठंड रहती है। अमन मेहता और राहुल मेहता ने बताया कि पहले इस ट्रेक पर बड़े-बड़े ग्लेशियर थे, लेकिन अब यह तेजी से पिघल रहे हैं। ग्लेशियरों की यह स्थिति चिंताजनक है। इसको लेकर सरकार से लेकर पर्यावरणविदें को काम करने की जरूरत है। कहा कि ग्लेशियरों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
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सात दिन के भ्यूंडार-गमशाली ट्रेक को तीन दिन में किया पार
जोशीमठ के दो ट्रकरों ने रिकॉर्ड समय में किया इसे पार
ट्रेक पर तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों पर जताई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
जोशीमठ। जोशीमठ निवासी माउंटेन टैक्स (ट्रेकर कंपनी) के राहुल मेहता और हाइका द हिमालय के अमन मेहता ने 5100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भ्यूंडार-गमशाली ट्रेक को तीन दिन के रिकार्ड समय में पूरा कर लिया। जबकि अति दुर्गम इस ट्रेक को पार करने में सामान्य तौर पर छह से सात दिन लगते हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में ग्लेशियरों की स्थिति चिंताजनक है। यहां ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
राहुल और अमन ने बताया कि करीब 60 किमी लंबे इस ट्रेक को फूलों की घाटी से शुरू किया जाता है और पिटरा खर्क, भ्यूंडार आइसफाल, भ्यूंडार खाल, रतावन जैसे स्थलों से होकर गमशाली गांव पहुंचा जाता है। पूरे ट्रेक पर बर्फ होने के कारण कड़ाके की ठंड रहती है। अमन मेहता और राहुल मेहता ने बताया कि पहले इस ट्रेक पर बड़े-बड़े ग्लेशियर थे, लेकिन अब यह तेजी से पिघल रहे हैं। ग्लेशियरों की यह स्थिति चिंताजनक है। इसको लेकर सरकार से लेकर पर्यावरणविदें को काम करने की जरूरत है। कहा कि ग्लेशियरों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
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