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हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजे शिवालय
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भारी बारिश के बावजूद सावन के पहले सोमवार को शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। सुबह से ही शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे लगते रहे। भक्तों ने पूजा-अर्चना और जलाभिषेक कर भोलेनाथ से सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
नई टिहरी में सत्येश्वर महादेव मंदिर, त्रिदेव मंदिर, देवलसारी, सुरीदेवी मंदिर, कोटेश्वर, ओणेश्वर महादेव मंदिर, बेलेश्वर शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। ओणेश्वर महादेव मंदिर समिति के अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद भट्ट ने बताया कि हाथ सैनिटाइज करने के बाद ही शारीरिक दूरी के साथ श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए मंदिर में जाने दिया गया।
गोपेश्वर। यहां गोपीनाथ मंदिर के साथ ही पोखरी के बामनाथ, नागनाथ, सकलेश्वर, बटलेश्वर, दशमोलेश्वर मंदिर में शिव का जलाभिषेक किया। तृतीय केदार रुद्रनाथ, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ और पंचम केदार कल्पेश्वर मंदिर में भी दर्शनों के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ रहा है। वहीं नंदप्रयाग के मंगलेश्वर शिवालय में भंडारे का आयोजन किया गया। वहीं जोशीमठ के ज्योतेश्वर महादेव मंदिर में, पीपलकोटी, घाट, नंदप्रयाग के मंदिरों में भी जलाभिषेक किया गया।
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कर्णप्रयाग में गंगा माता मंदिर, उमा देवी मंदिर, थाना स्थित शिवालय में पूजा-अर्चना व जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। सिमली, लंगासू, नौटी, सिमल्ट, कनोठ, बगोली, शैलेश्वर महादेव मंदिर में भी सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। आदिबदरी में आकाशमुखी शिव लिंग वाले शिवालय में जलाभिषेक व पूजा करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती रही। देवाल, नंदकेशरी, तुनूड़ा, कोठी आदि में भी भक्तों ने जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
नारायणबगड़ के मींगेश्वर, मालेश्वर, लव-कुश,कमलेश्वर, कुंडेश्वर, देवीधूरा महामृत्युंजय और कौबेश्वर महादेव शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहा। देवीधुरा पर्वत शिखर पर विराजमान महामृत्युंजय महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने परखाल बाजार से 999 खड़ी सीढ़ियों को चढ़कर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। गैरसैंण के गंगेश्वर महादेव धुनारघाट, मेहलचौरी, हितेश्वर महादेव, बछुवाबाण में भक्तों का तांता लगा रहा।
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गोपीनाथ मंदिर के दर्शन किए
गोपेश्वर। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार सुबह आठ बजे गोपीनाथ मंदिर की पूजा-अर्चना की। उन्होंने करीब 15 मिनट तक मंदिर के गर्भगृह में गोपीनाथ भगवान की पूजा-अर्चना की। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट, महामंत्री नवल भट्ट के साथ ही अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे। मूसलाधार बारिश के बीच ही पूर्व सीएम मंदिर में पहुंचे, बारिश में ही उन्होंने मंदिर की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने पद्म विभूषित चंडी प्रसाद भट्ट के साथ पौधरोपण किया। संवाद
जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना की
श्रीनगर/पौड़ी। श्रावण मास के पहले सोमवार को शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। नगर के कमलेश्वर, नागेश्वर, कटकेश्वर व श्रीकोट के चंद्रेश्वर मंदिर सहित कीर्तिनगर चौरास क्षेत्र में किलकिलेश्वर, ढुंडप्रयाग, जटलेश्वर, व ढुंडसिर क्षेत्र के ढुंडेश्वर महादेव मंदिरों में भक्तों ने जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना की। देवप्रयाग के कोटेश्वर, धनेश्वर, ताड़ेश्वर, बिल्लेश्वर, बागेश्वर, विश्वेश्वर मंदिरों में जलाभिषेक के लिए शिव भक्त पहुंचे। वहीं पौड़ी में क्यूं कालेश्वर महादेव मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, देवलेश्वर महादेव मंदिर, थानेश्वर महादेव मंदिर, जगतेश्वर महादेव मंदिर, अर्द्धनारीश्वर मजरा महादेव मंदिर समेत अन्य शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। क्यूं कालेश्वर महादेव मंदिर के महंत अभय चेतन्यानंद मुनि महाराज ने बताया कि कोरोना महामारी के मानकों का पालन करते हुए श्रद्धालु जलाभिषेक कर रहे हैं।
देवस्थानम बोर्ड के कर्मचारियों व तीर्थपुरोहितों ने किया बाबा का जलाभिषेक
रुद्रप्रयाग। सावन माह के पहले सोमवार पर केदारनाथ समेत जिले के शिवालयों में भक्तों ने भगवान आशुतोष का गंगाजल और दूध से अभिषेक किया। मंदिरों में पूजा-अर्चना और पाठ का आयोजन भी किया गया।
सोमवार को रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड के कर्मचारियों व तीर्थपुरोहितों ने बाबा का जलाभिषेक किया। मंदिर के मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने आराध्य की पूजा-अर्चना करते हुए जलाभिषेक किया। उधर, द्वितीय केदार मद्महेश्वर में मुख्य पुजारी शिवलिंग और तृतीय केदार में मैठाणी ब्राह्मणों ने आराध्य का जलाभिषेक कर क्षेत्र, जनपद व उत्तराखंड की सुख-समृद्धि की कामना की। इधर, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ, भोलेश्वर मंदिर किमाणा, अगस्त्य ऋषि मंदिर अगस्त्यमुनि, रूच्छ महादेव कालीमठ, रुद्रनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग, पंचमुखी महादेव महड़, पुनणेश्वर महादेव, संगम, कोटेश्वर सहित जिले के अन्य प्राचीन शिवालयों व मठों में भक्तों ने आराध्य का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। संवाद
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नई टिहरी में सत्येश्वर महादेव मंदिर, त्रिदेव मंदिर, देवलसारी, सुरीदेवी मंदिर, कोटेश्वर, ओणेश्वर महादेव मंदिर, बेलेश्वर शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। ओणेश्वर महादेव मंदिर समिति के अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद भट्ट ने बताया कि हाथ सैनिटाइज करने के बाद ही शारीरिक दूरी के साथ श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए मंदिर में जाने दिया गया।
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गोपेश्वर। यहां गोपीनाथ मंदिर के साथ ही पोखरी के बामनाथ, नागनाथ, सकलेश्वर, बटलेश्वर, दशमोलेश्वर मंदिर में शिव का जलाभिषेक किया। तृतीय केदार रुद्रनाथ, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ और पंचम केदार कल्पेश्वर मंदिर में भी दर्शनों के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ रहा है। वहीं नंदप्रयाग के मंगलेश्वर शिवालय में भंडारे का आयोजन किया गया। वहीं जोशीमठ के ज्योतेश्वर महादेव मंदिर में, पीपलकोटी, घाट, नंदप्रयाग के मंदिरों में भी जलाभिषेक किया गया।
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कर्णप्रयाग में गंगा माता मंदिर, उमा देवी मंदिर, थाना स्थित शिवालय में पूजा-अर्चना व जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। सिमली, लंगासू, नौटी, सिमल्ट, कनोठ, बगोली, शैलेश्वर महादेव मंदिर में भी सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। आदिबदरी में आकाशमुखी शिव लिंग वाले शिवालय में जलाभिषेक व पूजा करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती रही। देवाल, नंदकेशरी, तुनूड़ा, कोठी आदि में भी भक्तों ने जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
नारायणबगड़ के मींगेश्वर, मालेश्वर, लव-कुश,कमलेश्वर, कुंडेश्वर, देवीधूरा महामृत्युंजय और कौबेश्वर महादेव शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहा। देवीधुरा पर्वत शिखर पर विराजमान महामृत्युंजय महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने परखाल बाजार से 999 खड़ी सीढ़ियों को चढ़कर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। गैरसैंण के गंगेश्वर महादेव धुनारघाट, मेहलचौरी, हितेश्वर महादेव, बछुवाबाण में भक्तों का तांता लगा रहा।
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गोपीनाथ मंदिर के दर्शन किए
गोपेश्वर। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार सुबह आठ बजे गोपीनाथ मंदिर की पूजा-अर्चना की। उन्होंने करीब 15 मिनट तक मंदिर के गर्भगृह में गोपीनाथ भगवान की पूजा-अर्चना की। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट, महामंत्री नवल भट्ट के साथ ही अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे। मूसलाधार बारिश के बीच ही पूर्व सीएम मंदिर में पहुंचे, बारिश में ही उन्होंने मंदिर की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने पद्म विभूषित चंडी प्रसाद भट्ट के साथ पौधरोपण किया। संवाद
जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना की
श्रीनगर/पौड़ी। श्रावण मास के पहले सोमवार को शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। नगर के कमलेश्वर, नागेश्वर, कटकेश्वर व श्रीकोट के चंद्रेश्वर मंदिर सहित कीर्तिनगर चौरास क्षेत्र में किलकिलेश्वर, ढुंडप्रयाग, जटलेश्वर, व ढुंडसिर क्षेत्र के ढुंडेश्वर महादेव मंदिरों में भक्तों ने जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना की। देवप्रयाग के कोटेश्वर, धनेश्वर, ताड़ेश्वर, बिल्लेश्वर, बागेश्वर, विश्वेश्वर मंदिरों में जलाभिषेक के लिए शिव भक्त पहुंचे। वहीं पौड़ी में क्यूं कालेश्वर महादेव मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, देवलेश्वर महादेव मंदिर, थानेश्वर महादेव मंदिर, जगतेश्वर महादेव मंदिर, अर्द्धनारीश्वर मजरा महादेव मंदिर समेत अन्य शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। क्यूं कालेश्वर महादेव मंदिर के महंत अभय चेतन्यानंद मुनि महाराज ने बताया कि कोरोना महामारी के मानकों का पालन करते हुए श्रद्धालु जलाभिषेक कर रहे हैं।
देवस्थानम बोर्ड के कर्मचारियों व तीर्थपुरोहितों ने किया बाबा का जलाभिषेक
रुद्रप्रयाग। सावन माह के पहले सोमवार पर केदारनाथ समेत जिले के शिवालयों में भक्तों ने भगवान आशुतोष का गंगाजल और दूध से अभिषेक किया। मंदिरों में पूजा-अर्चना और पाठ का आयोजन भी किया गया।
सोमवार को रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड के कर्मचारियों व तीर्थपुरोहितों ने बाबा का जलाभिषेक किया। मंदिर के मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने आराध्य की पूजा-अर्चना करते हुए जलाभिषेक किया। उधर, द्वितीय केदार मद्महेश्वर में मुख्य पुजारी शिवलिंग और तृतीय केदार में मैठाणी ब्राह्मणों ने आराध्य का जलाभिषेक कर क्षेत्र, जनपद व उत्तराखंड की सुख-समृद्धि की कामना की। इधर, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ, भोलेश्वर मंदिर किमाणा, अगस्त्य ऋषि मंदिर अगस्त्यमुनि, रूच्छ महादेव कालीमठ, रुद्रनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग, पंचमुखी महादेव महड़, पुनणेश्वर महादेव, संगम, कोटेश्वर सहित जिले के अन्य प्राचीन शिवालयों व मठों में भक्तों ने आराध्य का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। संवाद