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Chamoli News: लाटू मंदिर के कपाट खुले
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पुजारी ने आंखों पर पट्टी बांधकर गर्भगृह में किया प्रवेश
वाण गांव स्थित सिद्धपीठ लाटू देवता मंदिर के कपाट शुक्रवार को दोपहर डेढ़ बजे विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इस मौके पर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारी खीम सिंह ने आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया और दीपक जलाया। पंडित उमेश कुनियाल व रमेश कुनियाल ने वेद मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ संपन्न किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने देव व झोड़ा नृत्य भी किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र लाटू देवता के जयकारों से गुंजायमान हो गया। मंदिर समिति ने भंडारे का आयोजन भी किया। इस मौके पर मंदिर समिति के संयोजक कृष्णा सिंह, विधायक भूपालराम टम्टा, प्रमुख डॉ. दर्शन दानू, पूर्व प्रमुख उर्मिला बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य कृष्णा बिष्ट, राजेंद्र बिष्ट, हीरा पहाड़ी, जगत सिंह, हीरा बुग्याली, पान सिंह, उमेश मिश्रा, महाबीर बिष्ट, नरेंद्र बिष्ट, नंदी कुनियाल, जीवन मिश्रा, गब्बर सिंह मौजूद रहे। दूसरी ओर कुलिंग गांव स्थित लाटू मंदिर के कपाट भी खोले गए। मंदिर के पुजारी भुवन बिष्ट व पंडित जगदीश कुनियाल ने मंदिर के कपाट खोले। इस मौके पर बलबीर दानू, इंद्रसिंह राणा, महिपत सिंह, थान सिंह, जीत सिंह समेत कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
मंदिर में नहीं जाते भक्त
वाण गांव हिमालयी महाकुंभ नंदा राजजात का आबादी का अंतिम गांव है। इसके बाद निर्जन पड़ाव गैरोली पातल है। लाटू देवता को मां नंदा का धर्म भाई माना जाता है। नंदा राजजात यात्रा की अगुवाई वाण के बाद लाटू देवता का पश्वा करता है। वाण लाटू देवता का मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए रहस्य बना है। मंदिर में देवता किस रूप में विराजमान हैं, यह आज भी रहस्य बना हुआ है। पुजारी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं जबकि श्रद्धालु मंदिर से लगभग 15 मीटर दूरी से पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर के पुजारी खीम सिंह बताते हैं कि मान्यता है कि मंदिर में नागराज अपनी मणि के साथ रहते हैं जिसे देख पाना लोगों के बस में नहीं है। इसलिए आंख पर पट्टी बांधकर मंदिर में प्रवेश कर पूजा की जाती है। अन्य कोई कोई भी मंदिर में प्रवेश नहीं करता है।
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वाण गांव स्थित सिद्धपीठ लाटू देवता मंदिर के कपाट शुक्रवार को दोपहर डेढ़ बजे विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इस मौके पर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। मंदिर के पुजारी खीम सिंह ने आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया और दीपक जलाया। पंडित उमेश कुनियाल व रमेश कुनियाल ने वेद मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ संपन्न किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने देव व झोड़ा नृत्य भी किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र लाटू देवता के जयकारों से गुंजायमान हो गया। मंदिर समिति ने भंडारे का आयोजन भी किया। इस मौके पर मंदिर समिति के संयोजक कृष्णा सिंह, विधायक भूपालराम टम्टा, प्रमुख डॉ. दर्शन दानू, पूर्व प्रमुख उर्मिला बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य कृष्णा बिष्ट, राजेंद्र बिष्ट, हीरा पहाड़ी, जगत सिंह, हीरा बुग्याली, पान सिंह, उमेश मिश्रा, महाबीर बिष्ट, नरेंद्र बिष्ट, नंदी कुनियाल, जीवन मिश्रा, गब्बर सिंह मौजूद रहे। दूसरी ओर कुलिंग गांव स्थित लाटू मंदिर के कपाट भी खोले गए। मंदिर के पुजारी भुवन बिष्ट व पंडित जगदीश कुनियाल ने मंदिर के कपाट खोले। इस मौके पर बलबीर दानू, इंद्रसिंह राणा, महिपत सिंह, थान सिंह, जीत सिंह समेत कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
मंदिर में नहीं जाते भक्त
वाण गांव हिमालयी महाकुंभ नंदा राजजात का आबादी का अंतिम गांव है। इसके बाद निर्जन पड़ाव गैरोली पातल है। लाटू देवता को मां नंदा का धर्म भाई माना जाता है। नंदा राजजात यात्रा की अगुवाई वाण के बाद लाटू देवता का पश्वा करता है। वाण लाटू देवता का मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए रहस्य बना है। मंदिर में देवता किस रूप में विराजमान हैं, यह आज भी रहस्य बना हुआ है। पुजारी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं जबकि श्रद्धालु मंदिर से लगभग 15 मीटर दूरी से पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर के पुजारी खीम सिंह बताते हैं कि मान्यता है कि मंदिर में नागराज अपनी मणि के साथ रहते हैं जिसे देख पाना लोगों के बस में नहीं है। इसलिए आंख पर पट्टी बांधकर मंदिर में प्रवेश कर पूजा की जाती है। अन्य कोई कोई भी मंदिर में प्रवेश नहीं करता है।
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