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दस हजार सैलानी पहुंचे फूलों की घाटी
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली (गोपेश्वर)
Updated Mon, 31 Oct 2016 10:15 PM IST
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विश्व धरोहर फूलों की घाटी में इस बार पर्यटकों के आने का पिछला सारा रिकार्ड टूट गया। इस बार दस हजार सैलानी घाटी के दीदार को पहुंचे, जो घाटी की खोज के बाद का सबसे बड़ा रिकार्ड है। घाटी में उमड़ते सैलानियों को देख नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन भी खुश है।
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जून 2013 की आपदा में फूलों की घाटी तक जाने वाला पैदल ट्रैक कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे सैलानियों की आवाजाही भी कम हो गई थी, लेकिन एक वर्ष के अंतराल में जब घाटी तक पहुंचने वाले पैदल ट्रैक का सुधारीकरण कार्य हुआ तो घाटी में पर्यटकों का हुजूम उमड़ना शुरू हुआ।
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वर्ष 2014 में 4066 सैलानी घाटी के सैर-सपाटे पर पहुंचे। साल 2015 में यह संख्या 6510 पहुंच गई। वर्ष 2016 में एक जून को घाटी पर्यटकों के लिए खोली गई थी और 31 अक्तूबर को यह बंद कर दी गई। इस वर्ष सैलानियों का यह आंकड़ा पुराने सारे रिकार्ड तोड़कर दस हजार तक पहुंच गया।
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घाटी में प्रवेश पर सैलानियों से नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन शुल्क भी लेता है, जिससे इस बार पार्क प्रशासन को 17 लाख 25 हजार की आय भी प्राप्त हुई। जून 2013 की आपदा के कारण करीब आठ माह तक फूलों की घाटी बंद रही थी।
इसलिए हुई फूलों की घाटी विश्व धरोहर
समुद्र तल से 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित फूलों की घाटी का क्षेत्रफल 87.5 वर्ग किमी है। घाटी की लंबाई पांच किमी और चौड़ाई दो किमी है। इसकी खोज इंग्लैंड के पर्वतारोही फ्रेंक स्माइट ने वर्ष 1933 में की थी। फ्रेेंक ने वेली ऑफ फ्लावर नाम से एक किताब लिखी, जिसके बाद दुनिया भर में यह घाटी चर्चा में आई। घाटी में फूलों की 521 प्रजातियां खिलती हैं। यहां उच्च हिमालयी क्षेत्रों से बहने वाले झरने और दूर-दूर तक फैला भोजपत्र का जंगल है। चारों ओर से घाटी पर्वत श्रृंखलाओं से ढकी है। यहां ग्रासलैंड भी है तो वन क्षेत्र भी। टिपरी ग्लेशियर से पुष्पावती नदी निकलती है, जो घाटी के एक किनारे से बह रही है। यहां फूलों के साथ ही वन्य जीवों में स्नो लेपर्ड, कस्तूरा मृग, मोनाल, हिमालयन थार, ब्ल्यू शिप और ब्लैक बियर पाए जाते हैं। घाटी की विविधता को देखते हुए इसे वर्ष 2005 में विश्व धरोहर घोषित किया गया।
फूलों की घाटी में उमड़े पर्यटक
2016 - 10000
2015 - 6510
2014 - 181
2013 - 55
फूलों की घाटी में इस वर्ष पूरे सीजन में सैलानियों की चहल-पहल बनी रही। कई सैलानी घाटी का दीदार करने के बाद माणा ट्रैक से बदरीनाथ की यात्रा पर भी गए। घाटी में सैलानियों के लिए बैठने और व्यू प्वाइंट की सुविधा है। मौसम ने साथ दिया तो घाटी में आगामी सालों में भी सैलानियों के भारी संख्या में उमडने की उम्मीद है। - चंद्रशेखर जोशी, उप वन संरक्षक, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क, जोशीमठ (चमोली)।