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‘घोड़े-खच्चरों से मशीन की तरह ले रहे काम’
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हेमकुंड साहिब के पुलना में घोड़ा-खच्चर संचालकों से वार्ता करते पशुपालन के अपर निदेशक डा. अशोक कुम
- फोटो : GOPESHWAR
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पशुपालन विभाग के अपर निदेशक गढ़वाल डा. अशोक कुमार का कहना है कि केदारनाथ यात्रा के पैदल मार्ग पर घोड़े खच्चरों से मशीन जैसा काम लिया जा रहा है। क्षमता से अधिक काम लेने से ही जानवरों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से पशुओं के साथ क्रूरता है। उन्होंने कहा कि घोड़े-खच्चरों से एक दिन में एक ही चक्कर लगवाने के आदेश हैं। इसके बावजूद कुछ लोग चोरी छिपे दो चक्कर लगवा रहे हैं। इसकी सही से निगरानी की जरूरत है।
डा. अशोक कुमार हेमकुंड साहिब और केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े खच्चरों के संचालन का निरीक्षण कर गोपेश्वर पहुंचे। उन्होंने बताया कि केदारनाथ मार्ग पर कई घोड़े-खच्चरों की पीठ पर लगी काठी को उठाकर देखा तो उनके शरीर पर घाव थे। जानवरों से लगातार काम लेने और उनकी देखभाल में लापरवाही से ऐसा हो रहा है। उन्होंने माना कि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब मार्ग पर अब भी घोड़े-खच्चरों की सही ढंग से निगरानी नहीं हो पा रही है। इस संबंध में रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी के साथ भी बात की जाएगी।
उन्होंने कहा कि घोड़ा-खच्चर संचालकों को नियमों के पालन की हिदायत दी गई है। केदारनाथ में इसका संचालन जिला पंचायत और हेमकुंड साहिब में पर्यावरण विकास समिति (ईडीसी) करती है। दोनों को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। उनके साथ मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. प्रलयंकर नाथ और उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. पंकज जोशी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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भीगे चने और गर्म पानी दें
डा. अशोक कुमार ने बताया कि चने को रात को भिगोने के बाद ही घोड़े-खच्चरों को खिलाना चाहिए। साथ ही पीने के लिए गर्म पानी जरूरी है। इससे उनके पेट नहीं फूलेंगे और दर्द नहीं होगा। इस संबंध में संचालकों को भी हिदायत दी गई है।
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डा. अशोक कुमार हेमकुंड साहिब और केदारनाथ यात्रा मार्ग पर घोड़े खच्चरों के संचालन का निरीक्षण कर गोपेश्वर पहुंचे। उन्होंने बताया कि केदारनाथ मार्ग पर कई घोड़े-खच्चरों की पीठ पर लगी काठी को उठाकर देखा तो उनके शरीर पर घाव थे। जानवरों से लगातार काम लेने और उनकी देखभाल में लापरवाही से ऐसा हो रहा है। उन्होंने माना कि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब मार्ग पर अब भी घोड़े-खच्चरों की सही ढंग से निगरानी नहीं हो पा रही है। इस संबंध में रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी के साथ भी बात की जाएगी।
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उन्होंने कहा कि घोड़ा-खच्चर संचालकों को नियमों के पालन की हिदायत दी गई है। केदारनाथ में इसका संचालन जिला पंचायत और हेमकुंड साहिब में पर्यावरण विकास समिति (ईडीसी) करती है। दोनों को नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। उनके साथ मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. प्रलयंकर नाथ और उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. पंकज जोशी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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भीगे चने और गर्म पानी दें
डा. अशोक कुमार ने बताया कि चने को रात को भिगोने के बाद ही घोड़े-खच्चरों को खिलाना चाहिए। साथ ही पीने के लिए गर्म पानी जरूरी है। इससे उनके पेट नहीं फूलेंगे और दर्द नहीं होगा। इस संबंध में संचालकों को भी हिदायत दी गई है।