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Chamoli: 23 साल पहले दिए सुझावों का लेते संज्ञान तो हिमाचल में नहीं होता नुकसान, खतरे को लेकर किया था आगाह

Thu, 24 Aug 2023 02:04 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर (चमोली)
संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर (चमोली) Updated Thu, 24 Aug 2023 02:04 PM IST
सार

पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट ने विभिन्न समूह के प्रतिनिधियों के साथ एक से पांच नवंबर तक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और मनाली क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान व्यास घाटी बाढ़ से त्रस्त थी। तब उन्होंने देखा कि व्यास नदी का जलग्रहण क्षेत्र गंभीर खतरे में है।

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Taking cognizance of the suggestions given 23 years ago, there would have been no loss in Himachal
चंडी प्रसाद भट्ट - फोटो : अमरउजाला

विस्तार

गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट ने 23 साल पहले ही हिमाचल प्रदेश के व्यास नदी पर बढ़ते खतरे को लेकर केंद्र सरकार को आगाह कर दिया था। उन्होंने व्यास नदी के जलग्रहण क्षेत्रों (विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले गाड-गदेरों की निकासी स्थल) का प्राथमिकता के आधार पर संरक्षित किए जाने का सुझाव दिया था। मगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।

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अगर इन सुझावों पर अमल किया जाता तो हिमाचल में इतना नुकसान नहीं होता। वर्ष 2000 में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) राज्य के गठन के बाद हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर राज्य के विकास को लेकर पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट ने विभिन्न समूह के प्रतिनिधियों के साथ एक से पांच नवंबर तक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और मनाली क्षेत्र का दौरा किया था।
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व्यापक अध्ययन का सुझाव दिया था
इस दौरान व्यास घाटी बाढ़ से त्रस्त थी। तब उन्होंने देखा कि व्यास नदी का जलग्रहण क्षेत्र गंभीर खतरे में है। मनाली नदी ने भी अपने किनारों का विस्तार किया है। तब उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव अशोक साकिया को पत्र भेजकर व्यास नदी पर बढ़ते खतरे के प्रभाव को कम करने के लिए क्षेत्र के व्यापक अध्ययन का सुझाव दिया था।
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अध्ययन में व्यास नदी के बेसिन का भू-वैज्ञानिक और संरचनात्मक विन्यास करने, पिछले 30 वर्षों में वन क्षेत्र में आए बदलाव का अध्ययन, पिछली बाढ़ के साक्ष्य आदि को शामिल किया जाए। चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि इन सुझावों पर व्यापक स्तर पर कोई काम नहीं हुआ जिस कारण आज व्यास नदी तबाही का कारण बनी है।

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