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पीजी कालेज कर्णप्रयाग में संस्कृत विभाग की सात दिवसीय कार्यशाला संपन्न
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पीजी कॉलेज कर्णप्रयाग में संस्कृत विभाग के तत्वावधान में पंडितराज जगन्नाथ के काव्य शास्त्रीय अवदान एवं उनके ग्रंथ रसगंगाधर पर सात दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। समापन समारोह की अध्यक्षता पूर्व कुलपति और वर्तमान में पतंजलि विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति महावीर अग्रवाल ने की। उन्होंने कहा कि काव्यशास्त्र पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को रसगंगाधर का अध्ययन एक बार अवश्य करना चाहिए।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्रो. जगदीश प्रसाद सेमवाल ने कार्यशाला के संयोजक डॉ. मृगांक मलासी की सराहना की। कहा कि पंडितराज जगन्नाथ ने न मात्र साहित्य शास्त्र को पढ़ा, बल्कि दर्शन व्याकरण आदि शास्त्र को पढ़कर अपने ग्रंथ में उस ज्ञान को समाहित किया। रसगंगाधर को पढ़कर अनेक शास्त्रों का ज्ञान हो जाता है। इससे यह परिलक्षित होता है कि हमें किसी एक ही विषय को नहीं पढ़ना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि प्रो. सदाशिव द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत काव्यशास्त्र का ज्ञान निश्चित ही हमें भावी पीढ़ी को भी कराना चाहिए। इस मौके पर प्रो. गिरीशचंद्र पंत आदि मौजूद थे।
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समापन सत्र में मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्रो. जगदीश प्रसाद सेमवाल ने कार्यशाला के संयोजक डॉ. मृगांक मलासी की सराहना की। कहा कि पंडितराज जगन्नाथ ने न मात्र साहित्य शास्त्र को पढ़ा, बल्कि दर्शन व्याकरण आदि शास्त्र को पढ़कर अपने ग्रंथ में उस ज्ञान को समाहित किया। रसगंगाधर को पढ़कर अनेक शास्त्रों का ज्ञान हो जाता है। इससे यह परिलक्षित होता है कि हमें किसी एक ही विषय को नहीं पढ़ना चाहिए।
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विशिष्ट अतिथि प्रो. सदाशिव द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत काव्यशास्त्र का ज्ञान निश्चित ही हमें भावी पीढ़ी को भी कराना चाहिए। इस मौके पर प्रो. गिरीशचंद्र पंत आदि मौजूद थे।
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