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नृसिंह मंदिर में विराजमान हुई शंकराचार्य की गद्दी
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली
Updated Thu, 19 Nov 2015 07:22 PM IST
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बृहस्पतिवार को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ स्थित भगवान नृसिंह मंदिर में विराजमान हो गई है। अब बदरीनाथ की शीतकालीन यात्रा जोशीमठ/पांडुकेश्वर में ही होगी।
पांडुकेश्वर से सुबह 10 बजे आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और कई भक्तों ने जोशीमठ के लिए प्रस्थान किया। पांडुकेश्वर के ग्रामीणों ने फूल वर्षा कर गद्दी को जोशीमठ के लिए रवाना किया।
सुबह सवा ग्यारह बजे रावल शंकराचार्य गद्दी के साथ जोशीमठ नृसिंह मंदिर पहुंचे जहां सैकड़ों महिला, पुरुषों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। गढ़वाल स्काउट्स की बैंड धुनों के साथ जोशीमठ नगरी गुंजायमान हो उठी।
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श्रद्धालुओं ने नृसिंह मंदिर और शंकराचार्य गद्दी के दर्शन किए। रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने भगवान नृसिंह के मंदिर में विशेष पूजा की। महिलाओं ने मांगल गीत गाकर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की तो नृसिंह ग्रुप जोशीमठ के स्वयं सेवकों ने मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया।
इस मौके पर धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, सीईओ बीडी सिंह, भगवती प्रसाद नंबूरी, राजेंद्र सेमवाल, अवधेश अग्रवाल, प्रदीप भट्ट, प्रकाश नेगी और अमित दीपक सहित कई लोग मौजूद रहे।
60 साल बाद ध्यान बदरी मंदिर पहुंचे रावल
आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के नृसिंह मंदिर में विराजमान होने के बाद बदरीनाथ के रावल ईश्वरन नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने उर्गम घाटी स्थित ध्यान बदरी, केदारनाथ, घंटाकर्ण और कल्पेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की।
घाटी के ध्यान बदरी मंदिर में 60 सालों में पहली बार कोई रावल यहां पहुंचे। बड़गिंडा गांव स्थित ध्यान बदरी मंदिर में पूजा करने के बाद रावल ने कहा कि उर्गम घाटी देवी-देवताओं की भूमि है। उन्होंने क्षेत्रीय जनता को सनातन धर्म की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। घाटी के उर्गम, देवग्राम, ल्यारी, थेंणा, भर्की, भेंटा, पिलखी, गीरा और बांसा के ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर बदरीनाथ के रावल और धर्माधिकारी का स्वागत किया।
मान्यता है कि जब दुर्वाशा ऋषि ने इंद्र को श्राप दिया था तो इंद्र ने उर्गम घाटी के बड़गिंडा गांव में विष्णु भगवान की घोर तपस्या की थी। तब विष्णु ने यहां इंद्र को दर्शन किए थे। तब से वे यहां स्थापित हो गए। घाटी में पंचम केदार कल्पेश्वर भी मौजूद है।
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पांडुकेश्वर से सुबह 10 बजे आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और कई भक्तों ने जोशीमठ के लिए प्रस्थान किया। पांडुकेश्वर के ग्रामीणों ने फूल वर्षा कर गद्दी को जोशीमठ के लिए रवाना किया।
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सुबह सवा ग्यारह बजे रावल शंकराचार्य गद्दी के साथ जोशीमठ नृसिंह मंदिर पहुंचे जहां सैकड़ों महिला, पुरुषों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। गढ़वाल स्काउट्स की बैंड धुनों के साथ जोशीमठ नगरी गुंजायमान हो उठी।
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श्रद्धालुओं ने नृसिंह मंदिर और शंकराचार्य गद्दी के दर्शन किए। रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने भगवान नृसिंह के मंदिर में विशेष पूजा की। महिलाओं ने मांगल गीत गाकर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की तो नृसिंह ग्रुप जोशीमठ के स्वयं सेवकों ने मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया।
इस मौके पर धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, सीईओ बीडी सिंह, भगवती प्रसाद नंबूरी, राजेंद्र सेमवाल, अवधेश अग्रवाल, प्रदीप भट्ट, प्रकाश नेगी और अमित दीपक सहित कई लोग मौजूद रहे।
60 साल बाद ध्यान बदरी मंदिर पहुंचे रावल
आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के नृसिंह मंदिर में विराजमान होने के बाद बदरीनाथ के रावल ईश्वरन नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह ने उर्गम घाटी स्थित ध्यान बदरी, केदारनाथ, घंटाकर्ण और कल्पेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की।
घाटी के ध्यान बदरी मंदिर में 60 सालों में पहली बार कोई रावल यहां पहुंचे। बड़गिंडा गांव स्थित ध्यान बदरी मंदिर में पूजा करने के बाद रावल ने कहा कि उर्गम घाटी देवी-देवताओं की भूमि है। उन्होंने क्षेत्रीय जनता को सनातन धर्म की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। घाटी के उर्गम, देवग्राम, ल्यारी, थेंणा, भर्की, भेंटा, पिलखी, गीरा और बांसा के ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर बदरीनाथ के रावल और धर्माधिकारी का स्वागत किया।
मान्यता है कि जब दुर्वाशा ऋषि ने इंद्र को श्राप दिया था तो इंद्र ने उर्गम घाटी के बड़गिंडा गांव में विष्णु भगवान की घोर तपस्या की थी। तब विष्णु ने यहां इंद्र को दर्शन किए थे। तब से वे यहां स्थापित हो गए। घाटी में पंचम केदार कल्पेश्वर भी मौजूद है।