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दीपावली पर देव उत्सव और भैलु खेलने की हो रही थी तैयारी
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थराली के पैनगढ़ गांव में चार लोगों की मौत के बाद दीपावली की खुशियां मातम में बदल गई। नवरात्र के बाद इस गांव के लोग दीपावली का इंतजार कर रहे थे। शुक्रवार रात तक गांव में खूब चहल-पहल थी। पटाखों की आवाज के बीच लोग नौकरी पर बाहर रह रहे अपने परिजनों फोन कर बुला रहे थे। शनिवार सुबह पौने दो बजे तेज आवाज के साथ गांव के ऊपर पहाड़ी दरकी और फिर सब कुछ जमींदोज हो गया।
पैनगढ़ गांव के चार लोगों को शुक्रवार और शनिवार की रात एसी काली स्याह लेकर आई, जिसका उजाला उनके जीवन में फिर कभी नहीं आया। ग्रामीण दिनेश पुरोहित व सुभाष पुरोहित ने बताया कि दिन में खेतीबाड़ी का काम करने के बाद लोग रात को सोए हुए थे। इससे पहले गांव में दीपावली को लेकर उत्साह मनाया जा रहा था। दीपावली की रात देवउत्सव मनाने और भैलु खेलने पर चर्चा हो रही थी, लेकिन सुबह करीब पौने दो बजे तेज आवाज के साथ बिना बारिश के पहाड़ी दरकी और ग्रामीणों के मकान के ऊपर आ गिरी। मलबा गिरने के बाद आसपास के लोग उठे और चीख-पुकार मचने वाले भाग की ओर बेसुध होकर दौड़ पड़े। टार्च के उजाले में देखा तो मलबे और बोल्डर से मकानें क्षतिग्रस्त हो गए थे। फिर गांव में आवाज दी गई और अनहोनी की आशंका के बीच लोग उस मकान के पास पहुंचे जहां चार लोग दब चुके थे। सूचना पर स्थानीय प्रशासन पहुंचा, लेकिन तब तक चार जिंदगियां हमेशा के लिए दुनियां से विदा हो चुकी थी।
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पैनगढ़ गांव में करीब 80 परिवार रहते हैं। ग्रामीणों की आजीविका का साधन खेतीबाड़ी और नौकरी है। भूस्खलन से गांव की कृर्षि भूमि भी बरबाद हो गई है। इनमें से 50 परिवार भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में रहते हैं।
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पैनगढ़ गांव के चार लोगों को शुक्रवार और शनिवार की रात एसी काली स्याह लेकर आई, जिसका उजाला उनके जीवन में फिर कभी नहीं आया। ग्रामीण दिनेश पुरोहित व सुभाष पुरोहित ने बताया कि दिन में खेतीबाड़ी का काम करने के बाद लोग रात को सोए हुए थे। इससे पहले गांव में दीपावली को लेकर उत्साह मनाया जा रहा था। दीपावली की रात देवउत्सव मनाने और भैलु खेलने पर चर्चा हो रही थी, लेकिन सुबह करीब पौने दो बजे तेज आवाज के साथ बिना बारिश के पहाड़ी दरकी और ग्रामीणों के मकान के ऊपर आ गिरी। मलबा गिरने के बाद आसपास के लोग उठे और चीख-पुकार मचने वाले भाग की ओर बेसुध होकर दौड़ पड़े। टार्च के उजाले में देखा तो मलबे और बोल्डर से मकानें क्षतिग्रस्त हो गए थे। फिर गांव में आवाज दी गई और अनहोनी की आशंका के बीच लोग उस मकान के पास पहुंचे जहां चार लोग दब चुके थे। सूचना पर स्थानीय प्रशासन पहुंचा, लेकिन तब तक चार जिंदगियां हमेशा के लिए दुनियां से विदा हो चुकी थी।
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पैनगढ़ गांव में करीब 80 परिवार रहते हैं। ग्रामीणों की आजीविका का साधन खेतीबाड़ी और नौकरी है। भूस्खलन से गांव की कृर्षि भूमि भी बरबाद हो गई है। इनमें से 50 परिवार भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में रहते हैं।
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