{"_id":"63af2d2dad321740ab381efb","slug":"organic-agriculture-sales-center-started-in-mandal-area-gopeshwar-news-drn4324899179","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamoli News: मंडल क्षेत्र में जैविक कृषि विक्रय केंद्र शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamoli News: मंडल क्षेत्र में जैविक कृषि विक्रय केंद्र शुरू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने शुक्रवार को मंडल क्षेत्र के कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन, मनरेगा के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और शिक्षण संस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने मंडल में जैविक कृषि विक्रय केंद्र का उद्घाटन भी किया।
परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत जैविक उत्पादों को बेचने के लिए कृषि विभाग की ओर से मंडल में विक्रय केंद्र की स्थापना की है। जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से स्थानीय स्तर पर दाल, चावल, मंडुवा, सोयाबीन, मसाले, फरण आदि जैविक उत्पाद यहां बेचे जाएंगे। इसके बाद डीएम ने मंडल क्षेत्र में मनरेगा के तहत निर्मित मत्स्य तालाबों का निरीक्षण किया और उन्होंने मंडल घाटी को ट्राउट प्रजनन केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के निरीक्षण के दौरान संस्थान को स्थानीय स्तर पर उत्पादित जड़ी-बूटियों का बेचने और पर्यटकों को यहां पर उत्पादित जड़ी-बूटियों की जानकारी देने के निर्देश दिए। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी डा. ललित नारायण मिश्र, परियोजना निदेशक आनंद सिंह, जिला विकास अधिकारी सुमन राणा, मुख्य कृषि अधिकारी वीपी मौर्य, जल संस्थान के ईई आरके निर्वाल, जड़ी-बूटी संस्थान के वैज्ञानिक डा. सीपी कुनियाल और डा. एके भंडारी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत जैविक उत्पादों को बेचने के लिए कृषि विभाग की ओर से मंडल में विक्रय केंद्र की स्थापना की है। जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से स्थानीय स्तर पर दाल, चावल, मंडुवा, सोयाबीन, मसाले, फरण आदि जैविक उत्पाद यहां बेचे जाएंगे। इसके बाद डीएम ने मंडल क्षेत्र में मनरेगा के तहत निर्मित मत्स्य तालाबों का निरीक्षण किया और उन्होंने मंडल घाटी को ट्राउट प्रजनन केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के निरीक्षण के दौरान संस्थान को स्थानीय स्तर पर उत्पादित जड़ी-बूटियों का बेचने और पर्यटकों को यहां पर उत्पादित जड़ी-बूटियों की जानकारी देने के निर्देश दिए। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी डा. ललित नारायण मिश्र, परियोजना निदेशक आनंद सिंह, जिला विकास अधिकारी सुमन राणा, मुख्य कृषि अधिकारी वीपी मौर्य, जल संस्थान के ईई आरके निर्वाल, जड़ी-बूटी संस्थान के वैज्ञानिक डा. सीपी कुनियाल और डा. एके भंडारी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन