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नेता जी! सड़क बनती तो नहीं बहाना पड़ता पसीना
ब्यूरो/ अमर उजाला, कर्णप्रयाग।
Updated Sat, 28 Jan 2017 09:48 PM IST
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नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने प्रचार तेज कर दिया है, लेकिन सड़कों का निर्माण न होने के कारण उन्हें वोट के लिए पैदल ही गांवों तक जाना पड़ रहा है। लोग यही कह रहे हैं कि अगर गांव तक सड़कें पहुंचा दी होती तो नेताजी को अब पैदल चलकर पसीना नहीं बहाना पड़ता।
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गैरसैंण और कर्णप्रयाग ब्लाक के करीब 192 ग्राम पंचायतों में 150 से अधिक गांव ऐसे हैं जहां सड़कें नहीं बन पाई हैं। कोई वन अधिनियम के कारण अटकी है तो किसी अन्य कारण से। गैरसैंण ब्लाक का दूरस्थ गांव स्यूंणी मल्ली आठ किमी से अधिक पैदल दूरी पर है। यहां आगरचट्टी से खड़ी चढ़ाई पार कर गांव पहुंचना पड़ता है, लेकिन सड़क न होने से ग्रामीण नाराज हैं।
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ऐसे में नेता जी प्रचार के लिए गाड़ी से तो आ रहे हैं लेकिन गांवों तक पहुंचने के लिए उन्हें कई किमी की पैदल चलना पड़ रहा है। वहीं रामणा मल्ला में भी सड़क नहीं है। कर्णप्रयाग ब्लाक के ऐण्ड, सिरण, सकण्ड, स्वर्का, डोंठला, पैंखोली सहित कई गांवों के लिए सड़कें तो स्वीकृत हैं, लेकिन अधिकतर सड़कें वन अधिनियम क्लीयरेंस न होने के कारण लटकी हैं।
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स्यूंणी मल्ली के बलबीर सिंह, धीरज बिष्ट सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि बिना सड़क के आज भी बुजुर्गों और महिलाओं को डंडी और कंडी में अस्पतालों तक पहुंचाना पड़ता है। पैंखोली के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए कई बार प्रशासन को शिकायती पत्र भेजा, लेकिन सड़कें न होने का खामियाजा अब चुनावी मौसम में नेता झेल भुगत रहे हैं। प्रचार के लिए 4 से 6 किमी की पैदल दूरी वाले इन गांवों की पगडंडियां को पार कर उन्हें आना पड़ रहा है।