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मोनिका ने नदी में डूबते बच्चे की बचाई थी जान
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Mon, 25 Jan 2016 09:38 PM IST
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कालेश्वर की स्व. मोनिका को उत्तम जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया जाएगा।
इससे पूर्व मोनिका को 24 जनवरी 2015 को बाबू गैधानी से राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार भी मिल चुका है।
कर्णप्रयाग ब्लाक के कालेश्वर गांव की चंद्र मोहन सिंह और स्व. कमला देेवी की 16 वर्षीय बेटी मोनिका 15 जून 2014 को अलकनंदा के किनारे कपड़े धो रही थी।
इस दौरान गांव का 10 वर्षीय साहिल नदी में नहा रहा था और इस दौरान नदी के बहाव में वह बहने लगा।
मोनिका ने बिना समय गवाएं नदी में कूद कर साहिल को किनारे लगाया लेकिन अलकनंदा के तेज बहाव में खुद बह गई। इसके बाद उसका शव मिला था।
केंद्र सरकार ने मोनिका को मरणोपरांत 24 जनवरी 2015 को दिल्ली में मोनिका के दादा स्व. बलवंत सिंह और कालेश्वर के प्रधान हरीश चौहान को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।
विकलांग पिता के कंधों पर तीन बच्चों की जिम्मेदारी
कर्णप्रयाग। कालेश्वर गांव के चंद्रमोहन सिंह की बेटी स्व. मोनिका गांव के एक नौनिहाल साहिल को जीवन दे गई, लेकिन मोनिका के परिवार की मुश्किलें पहले से कई गुना बढ़ गई हैं।
जब मोनिका जीवित थी तो मोनिका के दादा स्व. बलवंत सिंह की पेंशन से सात लोगों के परिवार का गुजारा चलता था। मोनिका समेत उसकी दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई शामिल था।
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वर्ष 2014 में मोनिका की मौत हो गई। कालेश्वर के प्रधान हरीश चौहान कहते हैं कि अगस्त 2015 में स्व. मोनिका के दादा बलवंत सिंह का भी निधन हो गया, जिसके बाद परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी मोनिका की मां कमला देवी ने उठाई और खेती और स्वयं सेवी संस्था में काम करने लगी।
12 जनवरी 2016 को मोनिका की मां कमला देवी का भी निधन हो गया। ऐसे में मोनिका की दो छोटी बहनें रितु (16) और निकिता (13) नितेश जो क्रमश: 11वीं, 8वीं और तीसरी कक्षा में पढ़ रहे हैं
उनके पढ़ाई के साथ-साथ भरण पोषण की जिम्मेदारी विकलांग चंद्रमोहन सिंह (मोनिका के पिता) पर आ गई। प्रधान हरीश चौहान का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकारों से स्व. मोनिका के परिवार को लगातार सहायता के लिए लिखा जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
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इससे पूर्व मोनिका को 24 जनवरी 2015 को बाबू गैधानी से राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार भी मिल चुका है।
कर्णप्रयाग ब्लाक के कालेश्वर गांव की चंद्र मोहन सिंह और स्व. कमला देेवी की 16 वर्षीय बेटी मोनिका 15 जून 2014 को अलकनंदा के किनारे कपड़े धो रही थी।
इस दौरान गांव का 10 वर्षीय साहिल नदी में नहा रहा था और इस दौरान नदी के बहाव में वह बहने लगा।
मोनिका ने बिना समय गवाएं नदी में कूद कर साहिल को किनारे लगाया लेकिन अलकनंदा के तेज बहाव में खुद बह गई। इसके बाद उसका शव मिला था।
केंद्र सरकार ने मोनिका को मरणोपरांत 24 जनवरी 2015 को दिल्ली में मोनिका के दादा स्व. बलवंत सिंह और कालेश्वर के प्रधान हरीश चौहान को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।
विकलांग पिता के कंधों पर तीन बच्चों की जिम्मेदारी
कर्णप्रयाग। कालेश्वर गांव के चंद्रमोहन सिंह की बेटी स्व. मोनिका गांव के एक नौनिहाल साहिल को जीवन दे गई, लेकिन मोनिका के परिवार की मुश्किलें पहले से कई गुना बढ़ गई हैं।
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जब मोनिका जीवित थी तो मोनिका के दादा स्व. बलवंत सिंह की पेंशन से सात लोगों के परिवार का गुजारा चलता था। मोनिका समेत उसकी दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई शामिल था।
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वर्ष 2014 में मोनिका की मौत हो गई। कालेश्वर के प्रधान हरीश चौहान कहते हैं कि अगस्त 2015 में स्व. मोनिका के दादा बलवंत सिंह का भी निधन हो गया, जिसके बाद परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी मोनिका की मां कमला देवी ने उठाई और खेती और स्वयं सेवी संस्था में काम करने लगी।
12 जनवरी 2016 को मोनिका की मां कमला देवी का भी निधन हो गया। ऐसे में मोनिका की दो छोटी बहनें रितु (16) और निकिता (13) नितेश जो क्रमश: 11वीं, 8वीं और तीसरी कक्षा में पढ़ रहे हैं
उनके पढ़ाई के साथ-साथ भरण पोषण की जिम्मेदारी विकलांग चंद्रमोहन सिंह (मोनिका के पिता) पर आ गई। प्रधान हरीश चौहान का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकारों से स्व. मोनिका के परिवार को लगातार सहायता के लिए लिखा जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।