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गरुड़ में बैठकर अपने धाम के लिए रवाना हुए भगवान बदरीनाथ
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जोशीमठ में गरुड़ छाड़ मेला हुआ आयोजित।
- फोटो : GOPESHWAR
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बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले होने वाला गरुड़ छाड़ मेला बृहस्पतिवार को आयोजित किया गया। बदरीनाथ के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान बदरीनाथ को गरुड़ में बैठाकर बदरीनाथ धाम के लिए रवाना किया।
बदरीनाथ के कपाट खुलने से पहले हर साल जोशीमठ में गरुड़छाड़ मेले का आयोजन होता है। बृहस्पतिवार को हुए मेले में छावनी बाजार से नृसिंह मंदिर तक रस्सी लगाई गई। रस्सी में लकड़ी से निर्मित गरुड़ की प्रतिमा को बांधकर दूसरे छोर के लिए छोड़ा गया। उसके बाद विष्णु भगवान की प्रतिमा को भी रस्सी के सहारे आगे भेजा गया। सदियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान बदरीनाथ को धाम के लिए गरुड़ में बैठाकर रवाना किया जाता है। मेले को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इस अवसर पर ज्योतिष्पीठ की ओर से गंगा आरती का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर देव पुजाई समिति के अध्यक्ष भगवती प्रसाद नंबूरी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार, बदरीनाथ के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, स्वामी मुकुंदानंद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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एक हजार रोट से की नृसिंह भगवान की पूजा
गरुड़छाड़ मेले के मौके पर ज्योतिष्पीठ की ओर से नृसिंह मंदिर में एक हजार रोट काटकर विष्णु सहस्रनाम से नृसिंह भगवान की पूजा की गई। इस दौरान बदरीनाथ के मुख्य पुजारी रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी का अभिनंदन किया गया। ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने बताया कि ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के आदेशानुसार यह पूजा अर्चना की गई। इस दौरान वेदपाठी रवींद्र भट्ट, कुशलानंद बहुगुणा आदि मौजूद रहे।
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बदरीनाथ के कपाट खुलने से पहले हर साल जोशीमठ में गरुड़छाड़ मेले का आयोजन होता है। बृहस्पतिवार को हुए मेले में छावनी बाजार से नृसिंह मंदिर तक रस्सी लगाई गई। रस्सी में लकड़ी से निर्मित गरुड़ की प्रतिमा को बांधकर दूसरे छोर के लिए छोड़ा गया। उसके बाद विष्णु भगवान की प्रतिमा को भी रस्सी के सहारे आगे भेजा गया। सदियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान बदरीनाथ को धाम के लिए गरुड़ में बैठाकर रवाना किया जाता है। मेले को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इस अवसर पर ज्योतिष्पीठ की ओर से गंगा आरती का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर देव पुजाई समिति के अध्यक्ष भगवती प्रसाद नंबूरी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार, बदरीनाथ के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, स्वामी मुकुंदानंद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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एक हजार रोट से की नृसिंह भगवान की पूजा
गरुड़छाड़ मेले के मौके पर ज्योतिष्पीठ की ओर से नृसिंह मंदिर में एक हजार रोट काटकर विष्णु सहस्रनाम से नृसिंह भगवान की पूजा की गई। इस दौरान बदरीनाथ के मुख्य पुजारी रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी का अभिनंदन किया गया। ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने बताया कि ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के आदेशानुसार यह पूजा अर्चना की गई। इस दौरान वेदपाठी रवींद्र भट्ट, कुशलानंद बहुगुणा आदि मौजूद रहे।
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