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Chamoli News: लोहाजंग का ईको टूरिज्म संग्रहालय जर्जर, छत- दरवाजे क्षतिग्रस्त
Sat, 23 May 2026 04:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 23 May 2026 04:14 PM IST
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लोहाजंग का ईको टूरिज्म संग्रहालय जर्जर, छत-दरवाजे क्षतिग्रस्त
-पर्यटकों की सुविधा के लिए वर्ष 2008 में हुआ था संग्रहालय का निर्माण
यशवंत बडियारी
देवाल। लोहाजंग में 2008 में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया बांस का संग्रहालय जर्जर स्थिति में है। इसकी छत, दरवाजे और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे स्थानीय संस्कृति से जुड़ी वस्तुएं खराब हो रही हैं। यह संग्रहालय पर्यटकों को स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों से परिचित कराता था। लोहाजंग 2250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक रमणीय स्थल है। यह रूपकुंड, वेदनी और ब्रह्मताल जैसे प्रसिद्ध बुग्यालों का मुख्य द्वार होने के चलते यहां काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। लोहाजंग में बदरीनाथ वन प्रभाग की ओर से निर्मित यह संग्रहालय एक समय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र था। बांस से बनी इसकी छत क्षतिग्रस्त होने के कारण बारिश का पानी अंदर आ रहा है। इससे संग्रहालय के अंदर रखी चीजें खराब हो रही हैं। लोहाजंग के इंद्र सिंह राणा ने बताया कि संग्रहालय पर्यटकों का आकर्षक केंद्र है। उन्होंने कहा कि इसकी छत, दरवाजे और खिड़की क्षतिग्रस्त हो गए हैं। संग्रहालय में स्थानीय हस्तनिर्मित वस्तुएं, ढोल, दमाऊ, शंख, घंटी, तांबे के बर्तन और ऊन के उत्पाद रखे गए थे। लेकिन बदहाल संग्रहालय में ये चीजें भी खराब हो रही हैं।
वर्जन: 2008 में बने इस संग्रहालय की छत खराब हो गई है। इसकी मरम्मत के लिए श्री नंदा राजजात की कार्ययोजना में एक अनुमान बनाकर भेजा गया है। धनराशि मिलने के बाद ही इसकी मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।-- मनोज देवराड़ी रेंजर
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-पर्यटकों की सुविधा के लिए वर्ष 2008 में हुआ था संग्रहालय का निर्माण
यशवंत बडियारी
देवाल। लोहाजंग में 2008 में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया बांस का संग्रहालय जर्जर स्थिति में है। इसकी छत, दरवाजे और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे स्थानीय संस्कृति से जुड़ी वस्तुएं खराब हो रही हैं। यह संग्रहालय पर्यटकों को स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों से परिचित कराता था। लोहाजंग 2250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक रमणीय स्थल है। यह रूपकुंड, वेदनी और ब्रह्मताल जैसे प्रसिद्ध बुग्यालों का मुख्य द्वार होने के चलते यहां काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। लोहाजंग में बदरीनाथ वन प्रभाग की ओर से निर्मित यह संग्रहालय एक समय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र था। बांस से बनी इसकी छत क्षतिग्रस्त होने के कारण बारिश का पानी अंदर आ रहा है। इससे संग्रहालय के अंदर रखी चीजें खराब हो रही हैं। लोहाजंग के इंद्र सिंह राणा ने बताया कि संग्रहालय पर्यटकों का आकर्षक केंद्र है। उन्होंने कहा कि इसकी छत, दरवाजे और खिड़की क्षतिग्रस्त हो गए हैं। संग्रहालय में स्थानीय हस्तनिर्मित वस्तुएं, ढोल, दमाऊ, शंख, घंटी, तांबे के बर्तन और ऊन के उत्पाद रखे गए थे। लेकिन बदहाल संग्रहालय में ये चीजें भी खराब हो रही हैं।
वर्जन: 2008 में बने इस संग्रहालय की छत खराब हो गई है। इसकी मरम्मत के लिए श्री नंदा राजजात की कार्ययोजना में एक अनुमान बनाकर भेजा गया है। धनराशि मिलने के बाद ही इसकी मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।
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