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मुंबई कौथिग में खूब बिक रहे किरूली के रिंगाल उत्पाद
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मुंबई में 24 जनवरी से दो फरवरी तक होने वाले मुंबई कौथिग में किरुली गांव के रिंगाल के उत्पादों की धूम मची है। कौथिग में स्थानीय लोगों को रिंगाल के उत्पाद खूब भा रहे हैं। ग्रामीण दरमानी लाल और उनके पुत्र राजेंद्र बंडवाल ने कौथिग में रिंगाल के उत्पाद उपलब्ध कराए हैं।
राजेंद्र बंडवाल ने बताया कि कौथिग में पहुंच रहे लोग रिंगाल के बने कलमदान, लैंप शेड, छंतोली, गैस, चाय ट्रे, नमकीन ट्रे, डस्टबिन, फूलदान, टोकरी, टोपी आदि वस्तुओं की खूब खरीदारी कर रहे हैं। नवी मुंबई में प्रतिवर्ष मुंबई कौथिग का आयोजन होता है। मुंबई में रहने वाले उत्तराखंड के लोग इस कौथिग का आयोजन करते हैं। कौथिग में उत्तराखंड की संस्कृति, प्रतिभाओं, बोली-भाषा और पहाड़ी उत्पादों को मंच मिलता है। मुंबई कौथिग के संयोजक केशर सिंह बिष्ट ने बताया कि इस बार 13वां मुंबई कौथिग आयोजित किया गया है।
इंसेट
प्लास्टिक का विकल्प हो सकता है रिंगाल
हस्त शिल्पी दरमानी लाल और राजेंद्र का कहना है यदि सरकार की ओर से हस्त शिल्पियों को प्रोत्साहन मिले तो रिंगाल के उत्पाद प्लास्टिक के विकल्प हो सकते हैं, जिससे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। सरकार को रिंगाल व्यवसाय को प्रोत्साहित करना चाहिए।
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राजेंद्र बंडवाल ने बताया कि कौथिग में पहुंच रहे लोग रिंगाल के बने कलमदान, लैंप शेड, छंतोली, गैस, चाय ट्रे, नमकीन ट्रे, डस्टबिन, फूलदान, टोकरी, टोपी आदि वस्तुओं की खूब खरीदारी कर रहे हैं। नवी मुंबई में प्रतिवर्ष मुंबई कौथिग का आयोजन होता है। मुंबई में रहने वाले उत्तराखंड के लोग इस कौथिग का आयोजन करते हैं। कौथिग में उत्तराखंड की संस्कृति, प्रतिभाओं, बोली-भाषा और पहाड़ी उत्पादों को मंच मिलता है। मुंबई कौथिग के संयोजक केशर सिंह बिष्ट ने बताया कि इस बार 13वां मुंबई कौथिग आयोजित किया गया है।
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प्लास्टिक का विकल्प हो सकता है रिंगाल
हस्त शिल्पी दरमानी लाल और राजेंद्र का कहना है यदि सरकार की ओर से हस्त शिल्पियों को प्रोत्साहन मिले तो रिंगाल के उत्पाद प्लास्टिक के विकल्प हो सकते हैं, जिससे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। सरकार को रिंगाल व्यवसाय को प्रोत्साहित करना चाहिए।
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