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चट्टानी रास्ते से आवाजाही कर रहे जुगजू के ग्रामीण
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ऋषिगंगा की आपदा से प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के मन से आपदा का भय नहीं निकल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के कारण समस्याएं कम ही नहीं हो रही हैं। जुगजू गांव का झूला पुल टूटने से ग्रामीणों को चट्टानी रास्ते से आवाजाही करनी पड़ रही है।
जुगजु गांव के मुरली सिंह रावत ने बताया कि नीती माणा घाटी समिति के प्रतिनिधियों ने सभी प्रभावित गांवों का भ्रमण किया है। क्षेत्र के लोग अभी भी आपदा का खौफ हैं। प्रशासन जिस तरह से अब बचाव कार्यों में ढिलाई बरत रहा है उससे लगता है कि वह इसको जल्दी बंद कर देगा। तब यहां न कोई नेता आएगा और न ही प्रशासन का कोई आदमी, लेकिन ग्रामीणों को तो यहीं रहना है। आपदा को तीन सप्ताह से भी ज्यादा हो गए हैं। क्षेत्र के गांवों में जनधन का बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन अब वह समस्याएं दूर न होने पर भी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि गांव के लिए नया झूला पुल बनाया जा रहा है, लेकिन निर्माण की सुस्त गति है। अभी तक दो प्रतिशत काम भी नहीं हुआ है। उन्होंने पुल बनने तक आवाजाही करने के लिए ट्रॉली लगाने की मांग की। कहा कि अभी ग्रामीणों को चट्टानी रास्ते से आवाजाही करनी पड़ रही है।
पीड़ित परिवार की नहीं ली सुध
- आपदा के बाद से गांव की माधवी देवी लापता हैं। उनके तीन बच्चे हैं और पति दिव्यांग है। आपदा के इतने दिन बीत गए इसके बाद भी शासन-प्रशासन का कोई भी व्यक्ति पीड़ित परिवार का हाल जानने नहीं आया। गांव के ही एक परिवार का पक्का मकान भी आपदा की भेंट चढ़ गया था। प्रशासन ने परिवार को थोड़ी बहुत मदद की, लेकिन वह नाकाफी थी।
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जुगजु गांव के मुरली सिंह रावत ने बताया कि नीती माणा घाटी समिति के प्रतिनिधियों ने सभी प्रभावित गांवों का भ्रमण किया है। क्षेत्र के लोग अभी भी आपदा का खौफ हैं। प्रशासन जिस तरह से अब बचाव कार्यों में ढिलाई बरत रहा है उससे लगता है कि वह इसको जल्दी बंद कर देगा। तब यहां न कोई नेता आएगा और न ही प्रशासन का कोई आदमी, लेकिन ग्रामीणों को तो यहीं रहना है। आपदा को तीन सप्ताह से भी ज्यादा हो गए हैं। क्षेत्र के गांवों में जनधन का बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन अब वह समस्याएं दूर न होने पर भी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि गांव के लिए नया झूला पुल बनाया जा रहा है, लेकिन निर्माण की सुस्त गति है। अभी तक दो प्रतिशत काम भी नहीं हुआ है। उन्होंने पुल बनने तक आवाजाही करने के लिए ट्रॉली लगाने की मांग की। कहा कि अभी ग्रामीणों को चट्टानी रास्ते से आवाजाही करनी पड़ रही है।
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पीड़ित परिवार की नहीं ली सुध
- आपदा के बाद से गांव की माधवी देवी लापता हैं। उनके तीन बच्चे हैं और पति दिव्यांग है। आपदा के इतने दिन बीत गए इसके बाद भी शासन-प्रशासन का कोई भी व्यक्ति पीड़ित परिवार का हाल जानने नहीं आया। गांव के ही एक परिवार का पक्का मकान भी आपदा की भेंट चढ़ गया था। प्रशासन ने परिवार को थोड़ी बहुत मदद की, लेकिन वह नाकाफी थी।
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