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सिंचाई विभाग के जेई को छह घंटे तक बनाया बंधक
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चमोली के बमोथ गांव में ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के जेई को बनाया बंधक।
- फोटो : GOPESHWAR
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पोखरी ब्लॉक के बमोथ गांव की सिंचाई नहर में पानी की सप्लाई न होने पर मंगलवार को आक्रोशित महिलाओं और ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के जेई को पंचायत घर में छह घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों ने कहा कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण गांव की उपजाऊ भूमि बिना पानी के सूखी पड़ी है। जेई ने एक सप्ताह में नहर में सुचारु पानी की सप्लाई का लिखित आश्वासन दिया जिस पर ग्रामीणों ने उन्हें छोड़ गया।
बमोथ गांव में लगभग 350 परिवार रहते करते हैं। गांव में खेतों की सिंचाई के लिए करछूना गदेरे से तीन किलोमीटर सिंचाई नहर जाती है, लेकिन दस सालों से नहर पर सुचारु रूप से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। कहा कि सिंचाई विभाग की ओर से प्रतिवर्ष नहर की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं इसके बाद भी गांव में खेत सूखे पड़े हैं। मंगलवार को ग्रामीणों के शिकायती पत्र पर जेई दिनेश चंद्र सुबह नौ बजे गांव में पंचायत घर में पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता की और आश्वासन दिया कि नहर पर पानी की सप्लाई सुचारु कर दी जाएगी, लेकिन ग्रामीण एक सप्ताह में पानी की सप्लाई करने की मांग पर अड़े गए। इसके बाद 10 बजे सभी ग्रामीण जेई को पंचायत घर में छोड़कर बाहर चले गए और कमरे के बाहर से ताला लगा दिया। करीब चार घंटे बाद शाम 4 बजे जेई ने ग्रामीणों को एक सप्ताह में नहर पर पानी की सप्लाई सुचारु करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें छोड़ दिया। इस मौके पर ग्राम प्रधान पूनम देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य विजयलक्ष्मी, पूर्व प्रधान प्रकाश रावत, सुनील चमोली, आशा देवी, जशोदा देवी आदि मौजूद थे।
ग्रामीणों ने पूर्व सीएम का भी किया था घेराव
गोपेश्वर। बमोथ सिंचाई नहर के सुधारीकरण की मांग पर वर्ष 2014 में गौचर मेले में ग्रामीणों ने तत्कालीन सीएम हरीश रावत का भी घेराव किया था। तब उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को शीघ्र नहर दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी नहर पर सुचारु रूप से पानी नहीं आया। फिर वर्ष 2016 में ग्रामीणों ने गांव में पहुंचे सिंचाई विभाग के ईई, एई और जेई को भी बंधक बनाया था, लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। सिंचाई नहर की स्थिति जस की तस बनी है।
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बमोथ गांव में लगभग 350 परिवार रहते करते हैं। गांव में खेतों की सिंचाई के लिए करछूना गदेरे से तीन किलोमीटर सिंचाई नहर जाती है, लेकिन दस सालों से नहर पर सुचारु रूप से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। कहा कि सिंचाई विभाग की ओर से प्रतिवर्ष नहर की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं इसके बाद भी गांव में खेत सूखे पड़े हैं। मंगलवार को ग्रामीणों के शिकायती पत्र पर जेई दिनेश चंद्र सुबह नौ बजे गांव में पंचायत घर में पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता की और आश्वासन दिया कि नहर पर पानी की सप्लाई सुचारु कर दी जाएगी, लेकिन ग्रामीण एक सप्ताह में पानी की सप्लाई करने की मांग पर अड़े गए। इसके बाद 10 बजे सभी ग्रामीण जेई को पंचायत घर में छोड़कर बाहर चले गए और कमरे के बाहर से ताला लगा दिया। करीब चार घंटे बाद शाम 4 बजे जेई ने ग्रामीणों को एक सप्ताह में नहर पर पानी की सप्लाई सुचारु करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें छोड़ दिया। इस मौके पर ग्राम प्रधान पूनम देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य विजयलक्ष्मी, पूर्व प्रधान प्रकाश रावत, सुनील चमोली, आशा देवी, जशोदा देवी आदि मौजूद थे।
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ग्रामीणों ने पूर्व सीएम का भी किया था घेराव
गोपेश्वर। बमोथ सिंचाई नहर के सुधारीकरण की मांग पर वर्ष 2014 में गौचर मेले में ग्रामीणों ने तत्कालीन सीएम हरीश रावत का भी घेराव किया था। तब उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को शीघ्र नहर दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी नहर पर सुचारु रूप से पानी नहीं आया। फिर वर्ष 2016 में ग्रामीणों ने गांव में पहुंचे सिंचाई विभाग के ईई, एई और जेई को भी बंधक बनाया था, लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। सिंचाई नहर की स्थिति जस की तस बनी है।

बमोथ गांव में सिंचाई विभाग के जेई को पंचायत घर में बंधक बनातीं महिलाएं।- फोटो : GOPESHWAR
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