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Chamoli News: सड़क नहीं बन सकती तो विस्थापित कर दे सरकार
Mon, 23 Sep 2024 06:28 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Mon, 23 Sep 2024 06:28 PM IST
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फोटो
पत्रकार वार्ता में बोले डुमक के ग्रामीण, कहा लंबे समय से कर रहे हैं सड़क निर्माण की मांग
सरकार ने 2010 के एलाइनमेंट के आधार पर सड़क निर्माण का आदेश किया था जारी, मगर नहीं हुआ काम
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। सड़क के लिए आंदोलित डुमक के ग्रामीणों ने सड़क नहीं बनने पर उनके गांव के विस्थापन की मांग उठाई। कहा कि डेढ़ दशक से सड़क का इंतजार कर रहे हैं और आंदोलन के बावजूद डुमक गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। गांव तक पहुंचने के लिए आज भी 8 किमी पैदल चलना पड़ता है।
सोमवार को डुमक के ग्रामीणों ने गोपेश्वर में पत्रकार वार्ता की। कहा कि वर्ष 2007-08 में पीएमजीएसवाई के तहत सैंजी लग्गा मैकोट बेमरू डुमक कलगोठ सड़क स्वीकृत हुई थी। वर्ष 2010 में 32.43 किमी सड़क पर कटिंग का काम शुरू हुआ लेकिन नौ किमी कटिंग के बाद काम बंद कर दिया गया। वर्ष 2015 में दूसरी कार्यदायी संस्था ने काम शुरू किया। दशोली ब्लॉक के अंतिम गांव स्यूंण तक करीब नौ किमी सड़क बनाने के बाद 2017 में काम रोक दिया गया। इसके बाद पीएमजीएसवाई ने सड़क का एलाइमेंट बदल दिया जिसमें स्यूंण से सीधे कलगोठ तक को जोड़ा गया लेकिन डुमक गांव को छोड़ दिया गया। वर्ष 2022 में विभाग ने कलगोठ से डुमक तक सड़क बनाई लेकिन इसे स्लाइड जोन पर बनाया गया, जिससे काम लटक गया। तब से काम अटका हुआ है। इसी साल जनवरी में उन्होंने आंदोलन किया तो शासन ने सड़क वर्ष 2010 के एलाइनमेंट के आधार पर ही बनाने का आदेश जारी किया लेकिन आज तक निर्माण नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनके गांव तक सड़क नहीं पहुंचाई जा सकती तो उन्हें विस्थापित कर दिया जाए जिससे लोगों की परेशानी कम हो सके। इस अवसर पर ग्रामीण प्रेम सिंह, राजेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, मनीष सिंह, अनिरुद्ध सनवाल आदि मौजूद रहे।
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पत्रकार वार्ता में बोले डुमक के ग्रामीण, कहा लंबे समय से कर रहे हैं सड़क निर्माण की मांग
सरकार ने 2010 के एलाइनमेंट के आधार पर सड़क निर्माण का आदेश किया था जारी, मगर नहीं हुआ काम
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। सड़क के लिए आंदोलित डुमक के ग्रामीणों ने सड़क नहीं बनने पर उनके गांव के विस्थापन की मांग उठाई। कहा कि डेढ़ दशक से सड़क का इंतजार कर रहे हैं और आंदोलन के बावजूद डुमक गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया है। गांव तक पहुंचने के लिए आज भी 8 किमी पैदल चलना पड़ता है।
सोमवार को डुमक के ग्रामीणों ने गोपेश्वर में पत्रकार वार्ता की। कहा कि वर्ष 2007-08 में पीएमजीएसवाई के तहत सैंजी लग्गा मैकोट बेमरू डुमक कलगोठ सड़क स्वीकृत हुई थी। वर्ष 2010 में 32.43 किमी सड़क पर कटिंग का काम शुरू हुआ लेकिन नौ किमी कटिंग के बाद काम बंद कर दिया गया। वर्ष 2015 में दूसरी कार्यदायी संस्था ने काम शुरू किया। दशोली ब्लॉक के अंतिम गांव स्यूंण तक करीब नौ किमी सड़क बनाने के बाद 2017 में काम रोक दिया गया। इसके बाद पीएमजीएसवाई ने सड़क का एलाइमेंट बदल दिया जिसमें स्यूंण से सीधे कलगोठ तक को जोड़ा गया लेकिन डुमक गांव को छोड़ दिया गया। वर्ष 2022 में विभाग ने कलगोठ से डुमक तक सड़क बनाई लेकिन इसे स्लाइड जोन पर बनाया गया, जिससे काम लटक गया। तब से काम अटका हुआ है। इसी साल जनवरी में उन्होंने आंदोलन किया तो शासन ने सड़क वर्ष 2010 के एलाइनमेंट के आधार पर ही बनाने का आदेश जारी किया लेकिन आज तक निर्माण नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनके गांव तक सड़क नहीं पहुंचाई जा सकती तो उन्हें विस्थापित कर दिया जाए जिससे लोगों की परेशानी कम हो सके। इस अवसर पर ग्रामीण प्रेम सिंह, राजेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, मनीष सिंह, अनिरुद्ध सनवाल आदि मौजूद रहे।
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