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रुद्रनाथ धाम तक पानी पहुंचने की जगी आस
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रुद्रनाथ धाम में जल्द पेयजल समस्या के समाधान की आस जगी है। मंदिर समिति, केदारनाथ वन प्रभाग और जल निगम गोपेश्वर ने इसके लिए संयुक्त निरीक्षण कर सर्वे किया। जल्द ही भूमि हस्तांतरण कर यहां पेयजल लाइन बिछाई जाएगी।
रुद्रनाथ धाम में लंबे समय से पेयजल समस्या बनी है। यहां के लिए पंचगंगा पेयजल योजना बनाई गई थी, लेकिन क्षेत्र केदारनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत होने के चलते लाइन बिछाने में वन विभाग की मंजूरी जरूरी थी। हाल ही में मंदिर समिति के सदस्य देवेंद्र सिंह बिष्ट ने डीएम स्वाति एस भदौरिया को ज्ञापन भेजकर वन विभाग और पेयजल निगम के संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की थी। डीएम के निर्देश पर वन विभाग, पेयजल निगम और मंदिर समिति ने इसका संयुक्त निरीक्षण किया। पंचगंगा स्रोत से रुद्रनाथ तक चार किमी पेयजल लाइन बिछाने पर चर्चा हुई। अब पेयजल निगम भूमि हस्तांतरण और लाइन बिछाने की डीपीआर बनाकर वन विभाग को भेजेगा और वन विभाग केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजेगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। वर्तमान में मंदिर में ग्रामीण व यात्री 500 मीटर दूर नारद कुंड से पानी लाते हैं। निरीक्षण में समिति के सदस्य देवेंद्र सिंह बिष्ट, जल निगम से वर्क एजेंट किशन सिंह, कमल सिंह, वन विभाग से वन दरोगा प्रदीप सिंह नेगी, वन बीट अधिकारी अरुण कुमार आदि शामिल थे।
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रुद्रनाथ धाम में लंबे समय से पेयजल समस्या बनी है। यहां के लिए पंचगंगा पेयजल योजना बनाई गई थी, लेकिन क्षेत्र केदारनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत होने के चलते लाइन बिछाने में वन विभाग की मंजूरी जरूरी थी। हाल ही में मंदिर समिति के सदस्य देवेंद्र सिंह बिष्ट ने डीएम स्वाति एस भदौरिया को ज्ञापन भेजकर वन विभाग और पेयजल निगम के संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की थी। डीएम के निर्देश पर वन विभाग, पेयजल निगम और मंदिर समिति ने इसका संयुक्त निरीक्षण किया। पंचगंगा स्रोत से रुद्रनाथ तक चार किमी पेयजल लाइन बिछाने पर चर्चा हुई। अब पेयजल निगम भूमि हस्तांतरण और लाइन बिछाने की डीपीआर बनाकर वन विभाग को भेजेगा और वन विभाग केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजेगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। वर्तमान में मंदिर में ग्रामीण व यात्री 500 मीटर दूर नारद कुंड से पानी लाते हैं। निरीक्षण में समिति के सदस्य देवेंद्र सिंह बिष्ट, जल निगम से वर्क एजेंट किशन सिंह, कमल सिंह, वन विभाग से वन दरोगा प्रदीप सिंह नेगी, वन बीट अधिकारी अरुण कुमार आदि शामिल थे।
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