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पिंडर नदी में गाद बढ़ने से दम तोड़ रही मछलियां
सार
बागेश्वर जिले के कुंवरगढ़ क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन से पिंडर नदी में गाद बढ़ गई जिससे नदी में महाशीर और ट्राउट मछलियों का जीवन संकट में पड़ गया है।साथ ही नदियों में सड़कों के निर्माण का मलबा भी डाला जा रहा है।
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विस्तार
बागेश्वर जिले के कुंवरगढ़ क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन से पिंडर नदी में गाद बढ़ गई जिससे नदी में महाशीर और ट्राउट मछलियों का जीवन संकट में पड़ गया है। वहीं कई मछलियां भी दम तोड़ रही हैं। इसके साथ ही निर्माणाधीन सड़कों का मलबा भी डंपिंग जोन में न डालकर पिंडर नदी में फेंका जा रहा है। इससे नदी के पानी में गाद की मात्रा बढ़ गई है।
गंगा की सहायक पिंडर नदी बागेश्वर जिले के पिंडारी ग्लेशियर से निकलकर कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी के साथ मिल जाती है, लेकिन पिछले तीन महीने से बागेश्वर के कुंवारी गांव के आसपास हो रहे भूस्खलन से नदी का पानी गादयुक्त हो गया है। जंतु विज्ञान के जानकारों का कहना है कि इन दिनों मछलियों के प्रजनन का समय है। नदी के मटमैले और गादयुक्त पानी से पिंडर में मछलियों की संख्या काफी कम हो गई है। साथ ही नदियों में सड़कों के निर्माण का मलबा भी डाला जा रहा है। कहा यदि जल्द वहां हो रहे भूस्खलन और सड़कों के मलबे को नदी में फेंकने से नहीं रोका गया तो नदी के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से मछलियों की प्रजाति समाप्त हो सकती है। वहीं, कुंवरगढ़ से कर्णप्रयाग तक नदी किनारे सैकड़ों मछलियाें की तड़पकर मौत हो रही है। वहीं बहुगुणा विचार मंच के गढ़वाल/कुमाऊं संयोजक हरीश पुजारी ने मत्स्य व पशुपालन विभाग मंत्री सौरभ बहुगुणा से नदी के पर्यावरण को बचाने की मांग उठाई है। इसके अलावा हरमल-झलिया-बदियाकोट, खेता-सौरीगाड़-झलिया, खेता-मानमती-रामपुर सड़कों का मलबा पिंडर नदी में न गिराए जाने की मांग भी उठाई।
कोट
बागेश्वर व चमोली जिले की सीमा कुंवरगढ़ में काफी बड़ा भूस्खलन जोन बना है। यहां पर करीब एक किलोमीटर के दायरे में लगातार पहाड़ी से मिट्टी खिसककर पिंडर नदी में गिर रही है। साथ ही वहां जो सड़कें बन रही हैं उनका मलबा भी नदी में डाला जा रहा है। इस संबंध में बागेश्वर प्रशासन को बता दिया गया है। - सर्वेश कुमार दूबे डीएफओ चमोली।
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गंगा की सहायक पिंडर नदी बागेश्वर जिले के पिंडारी ग्लेशियर से निकलकर कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी के साथ मिल जाती है, लेकिन पिछले तीन महीने से बागेश्वर के कुंवारी गांव के आसपास हो रहे भूस्खलन से नदी का पानी गादयुक्त हो गया है। जंतु विज्ञान के जानकारों का कहना है कि इन दिनों मछलियों के प्रजनन का समय है। नदी के मटमैले और गादयुक्त पानी से पिंडर में मछलियों की संख्या काफी कम हो गई है। साथ ही नदियों में सड़कों के निर्माण का मलबा भी डाला जा रहा है। कहा यदि जल्द वहां हो रहे भूस्खलन और सड़कों के मलबे को नदी में फेंकने से नहीं रोका गया तो नदी के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से मछलियों की प्रजाति समाप्त हो सकती है। वहीं, कुंवरगढ़ से कर्णप्रयाग तक नदी किनारे सैकड़ों मछलियाें की तड़पकर मौत हो रही है। वहीं बहुगुणा विचार मंच के गढ़वाल/कुमाऊं संयोजक हरीश पुजारी ने मत्स्य व पशुपालन विभाग मंत्री सौरभ बहुगुणा से नदी के पर्यावरण को बचाने की मांग उठाई है। इसके अलावा हरमल-झलिया-बदियाकोट, खेता-सौरीगाड़-झलिया, खेता-मानमती-रामपुर सड़कों का मलबा पिंडर नदी में न गिराए जाने की मांग भी उठाई।
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बागेश्वर व चमोली जिले की सीमा कुंवरगढ़ में काफी बड़ा भूस्खलन जोन बना है। यहां पर करीब एक किलोमीटर के दायरे में लगातार पहाड़ी से मिट्टी खिसककर पिंडर नदी में गिर रही है। साथ ही वहां जो सड़कें बन रही हैं उनका मलबा भी नदी में डाला जा रहा है। इस संबंध में बागेश्वर प्रशासन को बता दिया गया है। - सर्वेश कुमार दूबे डीएफओ चमोली।
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