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नौठा कौथिग में हुआ लाठी-डंडों का युद्ध

Mon, 18 May 2015 09:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली Updated Mon, 18 May 2015 09:54 PM IST
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नौठा कौथिग के दूसरे दिन ग्रामीणों ने भगवान आदिबदरी नाथ को नए अनाज का भोग लगाया गया। इसके बाद प्रतीकात्मक रूप से लाठी-डंडों का युद्ध (नौठा नृत्य) हुआ। मंदिर परिसर में आयोजित नौठा नृत्य देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने चौंफुला, थड्या और चांछड़ी आदि परंपरागत गीत और नृत्यों की प्रस्तुतियां दीं।

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सोमवार अपराह्न डेढ़ बजे खेती का नौठा नृत्य दल मालगुजार गुलाब सिंह के नेतृत्व में लाठी, डंडों, गाजे, बाजे और देवी की डोली के साथ आदिबदरी मंदिर प्रांगण पहुंचे।
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साथ ही चांदी के लट्ठ के साथ दिनेश पंवार, धर्म सिंह पंवार और नंदा सिंह पंवार प्रवेश द्वार पर पहुंचे। इसके बाद मंदिर समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी ने डोली की आरती उतारकर भव्य स्वागत किया।
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 इसके बाद खेती के गुलाब सिंह को टोपी पहनाकर स्वागत किया। मंदिर प्रांगण में पहुंचने के बाद खेती और रंडोली गांव के ग्रामीणों ने चौलाई के लड्डू और नए अनाज का भोग आदिबदरी नाथ को चढ़ाया। इसके बाद ढोल-दमाऊं की थाप पर नौठा नृत्य शुरू हुआ।

एक घंटे तक नृत्य के साथ लाठी डंडों का प्रतीकात्मक युद्ध हुुआ। मंदिर प्रांगण में पांडव नृत्य (पांडवाणी) के गायक श्याम सिंह ने पांडव लीला के कई  आख्यान गए।

दूसरी ओर रामलीला मैदान में लगे विभिन्न सरकारी स्टॉलों से लोगों ने जानकारियां हासिल कीं। इस अवसर पर दिनेश सिंह पंवार, विनोद नेगी, नरेंद्र सिंह चाकर, गैणा सिंह, नरेेश बरमोला, आदि मौजूद थे।

वक्त के साथ बदला नौठा का संघर्ष
वक्त के साथ मेला नौठा कौथिग का स्वरूप भी बदल गया। मल्ला चांदपुर के इस कौथिग में भगवान आदिबदरी नाथ को नए अनाज का भोग लगाने के लिए खूनी संघर्ष हुआ करता था।


वहीं मेला आज प्रतीकात्मक रूप से मनाया जाने लगा है। मालगुजार गुलाब सिंह कहते हैं कि शिक्षा और जागरूकता से आज पहले जैसा संघर्ष नहीं होता, लेकिन नई पीढ़ी इस सांस्कृतिक धरोहर को आज भी उसी रूप में मना रही है जो सराहनीय है।

मेले में आज
- रामलीला मैदान कुमाऊं सांस्कृतिक उत्थान समिति बागेश्वर के सांस्कृतिक कार्यक्रम सुबह 11 बजे से।
- तीन दिवसीय नौठा कौथिग का समापन दोपहर दो बजे।

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