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हाथ से प्रसाद छीन ले जाते हैं बंदर
पीपलकोटी/पोखरी
Updated Sat, 27 Feb 2016 09:53 PM IST
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हनुमान और दुर्गा मंदिर में बंदर श्रद्धालुओं के आते ही उसके हाथ से पूजा की थाली, प्रसाद छीनकर भाग जाते हैं। बंदर पहले से ही डेरा जमाए रहते हैं। ऐसे में लोगों को एक हाथ में डंडा और दूसरे हाथ में पूजा की थाली लेकर चलना पड़ता है।
स्थानीय निवासी भावना देवी, बेबी शाह, नीरू और कनक शाह का कहना है कि बंदर सुबह से ही मंदिर की छत और पेड़ों पर डेरा डाले रहते हैं। जैसे ही श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं, बंदर हाथ में झपट्टा मारकर प्रसाद छीन लेते हैं। वहीं, पोखरी विकास खंड के ग्राम पंचायत नैल, आलीसाल, सैम, सांकरी, त्रिशुला, संगूड़, भदूड़ा के साथ ही हापला घाटी के ग्रामीणों ने वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के डर से अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय तक छोड़ने जा रहे हैं। स्थानीय निवासी मीना रावत, बीना देवी, सुभागा रावत, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अवधेश रावत, अनिल सिंह और अनसूया प्रसाद का कहना है कि बंदरों से निजात दिलाने के लिए कई बार वन विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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स्थानीय निवासी भावना देवी, बेबी शाह, नीरू और कनक शाह का कहना है कि बंदर सुबह से ही मंदिर की छत और पेड़ों पर डेरा डाले रहते हैं। जैसे ही श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं, बंदर हाथ में झपट्टा मारकर प्रसाद छीन लेते हैं। वहीं, पोखरी विकास खंड के ग्राम पंचायत नैल, आलीसाल, सैम, सांकरी, त्रिशुला, संगूड़, भदूड़ा के साथ ही हापला घाटी के ग्रामीणों ने वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के डर से अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय तक छोड़ने जा रहे हैं। स्थानीय निवासी मीना रावत, बीना देवी, सुभागा रावत, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अवधेश रावत, अनिल सिंह और अनसूया प्रसाद का कहना है कि बंदरों से निजात दिलाने के लिए कई बार वन विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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