विश्व संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में शंकराचार्य मठ में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने संस्कृत को आम जन की भाषा बनाने और व्यवहार में लाने के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया।
संत स्वामी मुकुंदानंद ने कहा कि भारतीय धर्म संस्कृति ने संस्कृत को ‘देव भाषा’ का दर्जा दिया है, इसके बावजूद इस भाषा को अपनाने में नई पीढ़ी रुचि नहीं ले रही है। सरकार पर निर्भर रहने के बजाय शिक्षण संस्थान, धार्मिक, सामाजिक, साहित्यिक एवं संस्कृति से जुड़े लोग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम संयोजक हरीश डिमरी ने कहा कि संस्कृत को राज्य सरकार ने द्वितीय राज भाषा का दर्जा तो दिया, लेकिन इसके बाद इस दिशा में कुछ नहीं हो पाया। शिक्षक जगदीश बहुगुणा, सुरेंद्र खत्री ने भी अपने विचार रखे। इससे पूर्व कार्यक्रम में वेद पाठियों ने वैदिक मंगलाचरण का पाठ किया। इस मौके पर वेदपाठी कुशलानंद बहुगुणा, जगदंबा किमोठी, डा. राजेंद्र सिंह, जगदीश उनियाल, परशुराम खंडूड़ी, अनिल डिमरी, अभिषेक बहुगुणा और रेखा बिष्ट आदि मौजूद थे।