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डॉ. वेणीराम की पुस्तक एशिया व इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज
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पीजी कॉलेज कर्णप्रयाग के प्राध्यापक डॉ. वेणीराम अंथवाल।
- फोटो : KARNPRYAG
पीजी कॉलेज कर्णप्रयाग में इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. वेणीराम अंथवाल की पुस्तक उत्तराखंड की समृद्ध परंपरा ‘औखाण’ को एशिया बुक ऑफ रिकार्ड तथा इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज किया गया है। इससे पहले उनके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 40 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
पुस्तक के रचियता डॉ. वीआर अंथवाल मूल रूप से ग्राम-अंथवालगांव (टिहरी गढ़वाल) के मूल निवासी हैं। उन्होंने बताया की पुस्तक में उन्होंने 633 लोक कहावतों का जिक्र किया है। उनकी ओर से राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास तथा भारत की आजादी में उत्तराखंड के आजाद हिंद फौज के सैनिकों का योगदान सहित कई अन्य पुस्तकें लिखी गई हैं। वे महाविद्यालय की पत्रिका ‘कर्णप्रिया’ के प्रधान संपादक भी हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद ने कहा कि डॉ. अंथवाल की पुस्तक से नई पीढ़ी को अपने समृद्धशाली परंपराओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
क्या है औखाण
डॉ. अंथवाल के मुताबिक औखाण एक समृद्ध परंपरा है। इसका तात्पर्य पूर्व में घटित हो चुकी घटनाओं से शिक्षा गृहण करते हुए आगे का रास्ता तय करने से है। इससे नई पीढ़ी को अपनी दृष्टांतों के माध्यम से समृद्धशाली परंपराओं को समझकर आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है।
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पुस्तक के रचियता डॉ. वीआर अंथवाल मूल रूप से ग्राम-अंथवालगांव (टिहरी गढ़वाल) के मूल निवासी हैं। उन्होंने बताया की पुस्तक में उन्होंने 633 लोक कहावतों का जिक्र किया है। उनकी ओर से राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास तथा भारत की आजादी में उत्तराखंड के आजाद हिंद फौज के सैनिकों का योगदान सहित कई अन्य पुस्तकें लिखी गई हैं। वे महाविद्यालय की पत्रिका ‘कर्णप्रिया’ के प्रधान संपादक भी हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद ने कहा कि डॉ. अंथवाल की पुस्तक से नई पीढ़ी को अपने समृद्धशाली परंपराओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
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क्या है औखाण
डॉ. अंथवाल के मुताबिक औखाण एक समृद्ध परंपरा है। इसका तात्पर्य पूर्व में घटित हो चुकी घटनाओं से शिक्षा गृहण करते हुए आगे का रास्ता तय करने से है। इससे नई पीढ़ी को अपनी दृष्टांतों के माध्यम से समृद्धशाली परंपराओं को समझकर आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है।
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