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Chamoli News: वेतन नहीं मिलने से नाराज डॉक्टर ने नहीं किया काम, मरीज रहे परेशान
Mon, 19 Jan 2026 06:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Mon, 19 Jan 2026 06:57 PM IST
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-डॉक्टर बोले चार माह से नहीं मिला वेतन, मौखिक, पत्राचार, मेल से भी नहीं हुआ काम
देवाल। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सोमवार को मरीजों पर भारी पड़ गई, जब राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल में तैनात डॉक्टर ने चार माह से वेतन न मिलने के विरोध में मरीजों का इलाज करने से इन्कार कर दिया। इससे अस्पताल पहुंचे करीब 20 मरीजों को या तो बिना जांच के लौटना पड़ा या फिर मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदनी पड़ी।
सोमवार को अस्पताल में तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राबिन ड्यूटी पर तो पहुंचे लेकिन उन्होंने मरीजों को देखने से मना कर दिया। बमणबेरा निवासी धर्मानंद ने बताया कि वे अपने 80 वर्षीय पिता गोवर्धन कुनियाल को लेकर अस्पताल लाए थे लेकिन डॉक्टर ने मरीज को देखने से इन्कार कर दिया। अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों ने भी इलाज की गुहार लगाई लेकिन कोई परीक्षण नहीं किया गया। डॉ. राबिन ने मरीजों को बताया कि उन्हें पिछले चार माह से वेतन नहीं मिला है जिससे वे आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। इसी कारण उन्होंने कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि वेतन न मिलने की जानकारी कई बार विभागीय अधिकारियों को दी गई। शनिवार को ई-मेल के माध्यम से जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सोमवार से कार्य बहिष्कार की सूचना भी दी गई थी लेकिन इसके बावजूद वेतन का भुगतान नहीं हुआ। मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष उमेश मिश्रा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से दूरभाष पर शिकायत दर्ज कराई। इधर, इलाज न मिलने से मरीजों और उनके तीमारदारों में भारी नाराजगी देखी गई।
वर्जन--
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी से मेरी पूर्व में भी बात हुई थी। उनकी चार माह रूकी वेतन को निकाला जा रहा है। तकनीकी कारण से वेतन नहीं निकल पाया। लेकिन ड्यूटी नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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-- -- डॉ. अभिषेक गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी चमोली।
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देवाल। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सोमवार को मरीजों पर भारी पड़ गई, जब राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल में तैनात डॉक्टर ने चार माह से वेतन न मिलने के विरोध में मरीजों का इलाज करने से इन्कार कर दिया। इससे अस्पताल पहुंचे करीब 20 मरीजों को या तो बिना जांच के लौटना पड़ा या फिर मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदनी पड़ी।
सोमवार को अस्पताल में तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राबिन ड्यूटी पर तो पहुंचे लेकिन उन्होंने मरीजों को देखने से मना कर दिया। बमणबेरा निवासी धर्मानंद ने बताया कि वे अपने 80 वर्षीय पिता गोवर्धन कुनियाल को लेकर अस्पताल लाए थे लेकिन डॉक्टर ने मरीज को देखने से इन्कार कर दिया। अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों ने भी इलाज की गुहार लगाई लेकिन कोई परीक्षण नहीं किया गया। डॉ. राबिन ने मरीजों को बताया कि उन्हें पिछले चार माह से वेतन नहीं मिला है जिससे वे आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। इसी कारण उन्होंने कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि वेतन न मिलने की जानकारी कई बार विभागीय अधिकारियों को दी गई। शनिवार को ई-मेल के माध्यम से जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सोमवार से कार्य बहिष्कार की सूचना भी दी गई थी लेकिन इसके बावजूद वेतन का भुगतान नहीं हुआ। मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष उमेश मिश्रा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से दूरभाष पर शिकायत दर्ज कराई। इधर, इलाज न मिलने से मरीजों और उनके तीमारदारों में भारी नाराजगी देखी गई।
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वर्जन
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी से मेरी पूर्व में भी बात हुई थी। उनकी चार माह रूकी वेतन को निकाला जा रहा है। तकनीकी कारण से वेतन नहीं निकल पाया। लेकिन ड्यूटी नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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