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खोला गांव में पांडव लीला देखने उमड़े भक्त
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पंचाली में पांडव लीला में प्रतिभाग करते मेलार्थी
- फोटो : KARNPRYAG
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खोला गांव में आयोजित पांडव लीला देखने के लिए कर्णप्रयाग, सिमली, डिम्मर, टौंण, मज्याड़ी, नाकोट, कोलाडुंग्री, सैंण गांवों से भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बृहस्पतिवार को पांडव चौक में पांडव देवताओं ने शानदार परंपरागत नृत्य किया। इस दौरान भक्तों ने जयकारे लगाए और देवताओं पर पुष्प वर्षा की। देव उत्सव में पहुंचे भक्तों को पांडवों ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
प्रात:कालीन पूजा-अर्चना के बाद पांडव चौक पर विभिन्न गांवों से पांडव नृत्य देखने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। दोपहर में पारंपरिक वेशभूषा के साथ पांडव देवताओं के पश्वा अस्त्र-शस्त्रों के साथ आए। वाद्य कलाकारों ने ढोल दमाऊं और बाजे भंकोरों की थाप पर देवताओं का आह्वान किया। इस दौरान गांव की बुजुर्ग महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए। साथ ही पंडावाणी नृत्यगीत गाया। माता कुंती सहित सभी पांडव देवताओं ने अवतरित होकर भक्तों को सुफल दिया। गोपी डिमरी ने बताया कि पहाड़ में गांवों में श्रद्धा और उमंग से पांडव लीला का आयोजन सदियों से किया जाता रहा है। इस मौके पर डीएस रावत, उमेश खंडूड़ी, ज्ञान सिंह, झगड़ सिंह, मंगल सिंह, दर्शन सिंह, गोपाल सिंह, बीरेंद्र सिंह, सोवन सिंह, कुंदन सिंह, गजपाल सिंह और सूरज सिंह मौजूद थे।
36 तालों और 16 कलाओं पर पांडवों ने किया नृत्य
गैरसैंण। पंचाली गांव में एक माह से हो रहे पांडव नृत्य के अंतिम दिन गैंडा मेले का भव्य आयोजन किया गया। पांडव पश्वाओं और पांडव लीला के अन्य पात्रों ने पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार ढोल दमाऊं की 36 तालों और 16 कलाओं पर मनमोहक पांडव नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। मेले के अंत में अर्जुन ने बाणों से सांकेतिक रूप से गैंडे का वध किया। मेले में मुख्य अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता टीका प्रसाद मैखुरी ने धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को संजोए रखने का आह्वान किया। इस मौके पर प्रधान पुष्पा देवी, क्षेपंस वीरेंद्र आर्य, अब्बल सिंह, पदम सिंह, दरवान सिंह, कुंदन सिंह बिष्ट, गमाली राम, पूर्व प्रमुख सुमती बिष्ट, जगमोहन, खीम सिंह , वीरेंद्र सिंह नेगी आदि मौजूद रहे। संचालन दरवान सिंह ने किया। संवाद
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प्रात:कालीन पूजा-अर्चना के बाद पांडव चौक पर विभिन्न गांवों से पांडव नृत्य देखने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। दोपहर में पारंपरिक वेशभूषा के साथ पांडव देवताओं के पश्वा अस्त्र-शस्त्रों के साथ आए। वाद्य कलाकारों ने ढोल दमाऊं और बाजे भंकोरों की थाप पर देवताओं का आह्वान किया। इस दौरान गांव की बुजुर्ग महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए। साथ ही पंडावाणी नृत्यगीत गाया। माता कुंती सहित सभी पांडव देवताओं ने अवतरित होकर भक्तों को सुफल दिया। गोपी डिमरी ने बताया कि पहाड़ में गांवों में श्रद्धा और उमंग से पांडव लीला का आयोजन सदियों से किया जाता रहा है। इस मौके पर डीएस रावत, उमेश खंडूड़ी, ज्ञान सिंह, झगड़ सिंह, मंगल सिंह, दर्शन सिंह, गोपाल सिंह, बीरेंद्र सिंह, सोवन सिंह, कुंदन सिंह, गजपाल सिंह और सूरज सिंह मौजूद थे।
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36 तालों और 16 कलाओं पर पांडवों ने किया नृत्य
गैरसैंण। पंचाली गांव में एक माह से हो रहे पांडव नृत्य के अंतिम दिन गैंडा मेले का भव्य आयोजन किया गया। पांडव पश्वाओं और पांडव लीला के अन्य पात्रों ने पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार ढोल दमाऊं की 36 तालों और 16 कलाओं पर मनमोहक पांडव नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। मेले के अंत में अर्जुन ने बाणों से सांकेतिक रूप से गैंडे का वध किया। मेले में मुख्य अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता टीका प्रसाद मैखुरी ने धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों को संजोए रखने का आह्वान किया। इस मौके पर प्रधान पुष्पा देवी, क्षेपंस वीरेंद्र आर्य, अब्बल सिंह, पदम सिंह, दरवान सिंह, कुंदन सिंह बिष्ट, गमाली राम, पूर्व प्रमुख सुमती बिष्ट, जगमोहन, खीम सिंह , वीरेंद्र सिंह नेगी आदि मौजूद रहे। संचालन दरवान सिंह ने किया। संवाद
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