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10 वर्षों से निष्क्रिय पड़ी हैं 163 दुग्ध समितियां
कर्णप्रयाग
Updated Thu, 24 Dec 2015 06:58 PM IST
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दुग्ध उत्पादकों को बोनस और विभिन्न योजनाएं लागू करने के बावजूद जिले में दुग्ध व्यवसाय बढ़ नहीं पा रहा है। लगातार गिरते दुग्ध उत्पादन को लेकर जहां मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी चिंता जताई, वहीं बीस सूत्री क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष और बदरीनाथ के विधायक राजेंद्र भंडारी ने भी अधिकारियों की बैठक लेकर दुग्ध उत्पादन पर जोर देने के लिए कहा है। लेकिन संघ की उत्पादन समितियाें पर गौर करें तो पिछले दस सालों से संघ की 163 दुग्ध समितियां निष्क्रिय पड़ी हैं। ऐसे में दूध उत्पादन को बढ़ावा दिए जाने के प्रयास हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
जिले में दुग्ध संघ सिमली के तहत चमोली, पीपलकोटी और सिमली सहित अन्य दुग्ध विक्रय केंद्र संचालित होते हैं। हालांकि, जिले में दूध को बढ़ावा देने के लिए यहां 311 दुग्ध समितियां पंजीकृत हैं लेकिन महज 148 समितियां ही सक्रिय हैं। लचर प्रबंधन का हाल यह है कि 5000 लीटर क्षमता वाले दुग्ध केंद्र में महज 1411 लीटर दूध ही आ रहा है। वह भी पूरा नहीं बिक पा रहा है। संघ के आंकड़ों पर गौर करें तो एक दिन में संघ महज 1317 लीटर दूध बेच पाता है। जबकि जिले में पारस, गोपाल जी सहित कई अन्य दूध बंद पैकेटों में यहां खप रहा है। दुग्ध केंद्र की खस्ताहाल देखते हुए 6 दिसंबर को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गोपेश्वर के जनता दरबार में कहा कि बोनस दिए जाने के बावजूद दुग्ध व्यवसाय का न बढ़ पाना चिंता का विषय है। जिस पर बीस सूत्री क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष राजेंद्र भडारी ने शनिवार को अधिकारियों की बैठक कर मामले में कार्रवाई करने के निदेश दिए।
आखिर पशुपालक दुग्ध केंद्र में क्यों नहीं देते दूध
आखिर पशुपालक दुग्ध केंद्र में क्यों दूध नहीं देते यह बड़ा सवाल है। संघ के पूर्व अध्यक्ष धन सिंह नेगी का कहना है कि पशुपालकों का दूध बाजार में 35 से 40 रुपये प्रति लीटर बिकता है। जबकि संघ अब भी पशुपालकों को 16 से 26 रुपये प्रति लीटर दूध का मूल्य दे रहा है। वह भी समय पर नहीं मिलता। इसके चलते पशुपालक संघ के बजाए सीधे बाजार में दूध विक्रय करते हैं।
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कोट
दूध का व्यवसाय बढ़ाने के लिए गांवों में जाकर सर्वे किया जा रहा है। साथ ही सरकार और संघ की योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है लेकिन लंबे समय से संघ प्रबंधक की तैनाती नहीं है जिसके चलते कई दिक्कतें हो रही हैं।
- राजेश्वरी नेगी, अध्यक्ष जिला दुग्ध संघ सिमली, चमोली।
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जिले में दुग्ध संघ सिमली के तहत चमोली, पीपलकोटी और सिमली सहित अन्य दुग्ध विक्रय केंद्र संचालित होते हैं। हालांकि, जिले में दूध को बढ़ावा देने के लिए यहां 311 दुग्ध समितियां पंजीकृत हैं लेकिन महज 148 समितियां ही सक्रिय हैं। लचर प्रबंधन का हाल यह है कि 5000 लीटर क्षमता वाले दुग्ध केंद्र में महज 1411 लीटर दूध ही आ रहा है। वह भी पूरा नहीं बिक पा रहा है। संघ के आंकड़ों पर गौर करें तो एक दिन में संघ महज 1317 लीटर दूध बेच पाता है। जबकि जिले में पारस, गोपाल जी सहित कई अन्य दूध बंद पैकेटों में यहां खप रहा है। दुग्ध केंद्र की खस्ताहाल देखते हुए 6 दिसंबर को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गोपेश्वर के जनता दरबार में कहा कि बोनस दिए जाने के बावजूद दुग्ध व्यवसाय का न बढ़ पाना चिंता का विषय है। जिस पर बीस सूत्री क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष राजेंद्र भडारी ने शनिवार को अधिकारियों की बैठक कर मामले में कार्रवाई करने के निदेश दिए।
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आखिर पशुपालक दुग्ध केंद्र में क्यों नहीं देते दूध
आखिर पशुपालक दुग्ध केंद्र में क्यों दूध नहीं देते यह बड़ा सवाल है। संघ के पूर्व अध्यक्ष धन सिंह नेगी का कहना है कि पशुपालकों का दूध बाजार में 35 से 40 रुपये प्रति लीटर बिकता है। जबकि संघ अब भी पशुपालकों को 16 से 26 रुपये प्रति लीटर दूध का मूल्य दे रहा है। वह भी समय पर नहीं मिलता। इसके चलते पशुपालक संघ के बजाए सीधे बाजार में दूध विक्रय करते हैं।
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दूध का व्यवसाय बढ़ाने के लिए गांवों में जाकर सर्वे किया जा रहा है। साथ ही सरकार और संघ की योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है लेकिन लंबे समय से संघ प्रबंधक की तैनाती नहीं है जिसके चलते कई दिक्कतें हो रही हैं।
- राजेश्वरी नेगी, अध्यक्ष जिला दुग्ध संघ सिमली, चमोली।