{"_id":"5818c4944f1c1b0e57435f09","slug":"chamoli-in-field-crop-markets-demand","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैदानी मंडियों में भी चमोली की फसलों की डिमांड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैदानी मंडियों में भी चमोली की फसलों की डिमांड
अमर उजाला ब्यूरो/ गोपेश्वर (चमोली)
Updated Tue, 01 Nov 2016 10:06 PM IST
विज्ञापन
चमोली के उर्गम घाटी में खेतों की लहलहाती चैलाई की फसल।
- फोटो : amar ujala.
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस साल अगस्त और सितंबर माह में हुई अच्छी बारिश से चमोली जिले की निजमुला और उर्गम घाटी में राजमा, आलू और चौलाई की अच्छी पैदावार हुई है। इन दिनों जौनसार, सहारनपुर, रुड़की और नजीबाबाद की मंडियों से व्यापारी जिले में इन उत्पादों को खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
चमोली जिले में अधिकांश काश्तकार नकदी फसलों में खाद के लिए गोबर का प्रयोग करते हैं, जिससे ये फसलें स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। जैविक रुप से उत्पादित इन फसलों को मैदानी क्षेत्र के व्यवसायी हाथों हाथ लेते हैं। निजमुला घाटी के आलू व्यवसायी दयाल सिंह, हुकम सिंह, मदन सिंह, विक्रम सिंह का कहना है कि इस बार बारिश अच्छी होने से फसलों का उत्पादन आशा के अनुरूप हुआ है।
विज्ञापन
तैयार फसलों को स्थानीय बाजार के साथ ही मैदानी क्षेत्र की मंडियों में भेजा जाता है। घाट ब्लॉक से आलू का विपणन कर रहे कनोल गांव निवासी पार सिंह बिष्ट का कहना है कि वे अभी तक स्थानीय बाजार में करीब पचास क्विंटल आलू का विक्रय कर चुके हैं। उर्गम घाटी के काश्तकार मकर सिंह कहते हैं कि इस बार पांच क्विंटल राजमा का उत्पादन हुआ, जिसे मैदानी क्षेत्र की मंडियों के लिए भेजा गया है।
विज्ञापन
जोशीमठ प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी का कहना है कि सरकार की मंडुवा, चौलाई, राजमा के साथ ही स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन के लिए प्रस्तावित बोनस योजना से भी काश्तकारों में खेती को लेकर उत्साह है। जिले में चौलाई, आलू, राजमा, मंडुवा, झंगोरा, लाल धान, उड़द, गहत, तोर, सोयाबीन, रेंस, काले भट्ट, के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उत्पादित उगल और फाफर की अच्छी पैदावार होती है। विपणन के लिए क्षेत्र के व्यवसायी गांवों में ही विपणन केंद्र स्थापित करते हैं। ग्रामीणों को बाजार भाव के अनुसार ही उत्पादित फसलों का भुगतान हाथों हाथ कर दिया जाता है।
चमोली जिले से प्रतिवर्ष करीब दो हजार क्विंटल चौलाई का विपणन होता है। नकदी फसलों के विपणन की व्यवस्था सरकारी स्तर पर नहीं होती है। ग्रामीण स्वयं ही उत्पादों को मंडियों और स्थानीय बाजार में उपलब्ध करा देते हैं। काश्तकारों को प्रति वर्ष उन्नत बीजों और वैज्ञानिक कृषि तकनीक के बारे में बताया जाता है। - दिनेश कुमार, मुख्य कृषि अधिकारी, चमोली।
कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकार उन्नत बीजों का वितरण कर रही है। वैज्ञानिक कृषि पर जोर दे रही है। काश्तकारों के आर्थिक लाभ में वृद्धि हो सके, इसके लिए उत्पादित फसलों पर बोनस दिया जा रहा है। जैविक उत्पाद परिषद को नकदी फसलों के विपणन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। - राजेंद्र भंडारी, कृषि मंत्री, उत्तराखंड।