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चमोली: भालू के स्वभाव में बदलाव, अब गौशालाएं तोड़ मवेशियों को बना रहा निवाला, पोखरी बना दहशत का हॉट स्पॉट

Tue, 03 Nov 2026 02:27 PM IST
Renu Saklani प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर (चमोली)
प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर (चमोली) Published by: Renu Saklani Updated Tue, 03 Nov 2026 02:27 PM IST
सार

पहाड़ के गांवों में भालू की दस्तक अब सिर्फ लोगों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। आबादी में घुसकर गौशालाओं को निशाना बनाने और मवेशियों पर हमले की बढ़ती घटनाओं ने वन विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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Bears behaviour changing raises alarm as attacks on cattle increase 40 livestock killed last year
भालू - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

चमोली जिले में भालू के स्वभाव में बदलाव देखा जा रहा है। भालू आबादी क्षेत्र में पहुंचकर मवेशियों पर हमले कर रहा है। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष भालू ने 40 मवेशियों को मार डाला, जबकि इससे पूर्व के वर्षों में यह आंकड़ा पांच से 10 तक सीमित था। इस वर्ष भी अब तक करीब 15 मवेशियों को भालू अपना निवाला बना चुका है। आबादी क्षेत्र में गौशालाओं को तोड़कर मवेशियों पर हमले की बढ़ती घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

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जिले के ज्योतिर्मठ, पोखरी और दशोली क्षेत्र में भालू की दहशत अधिक बनीं हुई है। पोखरी ब्लॉक में भालू के मवेशियों पर हमलों की घटनाएं अधिक आ रही हैं। यहां चंद्रशिला पट्टी के बंगथल, डुंगर, कांडई चंद्रशिला, जौरासी, भिकोना और किमोठा गांवों में भालू गौशालाओं को तोड़कर मवेशियों को मार रहा है। मारे गए मवेशियों के कूबड़ और थन को खाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।

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केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन के अनुसार, भालू सर्वाहारी जीव है। उसके भोजन में फल, जड़ें, घास, कीड़े-मकोड़े, छोटे स्तनधारी और मांस भी शामिल हैं। जिले में मवेशियों को मारने की बढ़ती घटनाओं के पीछे उसके व्यवहार में बदलाव की आशंका है। पोखरी और ज्योतिर्मठ क्षेत्र में भालू की सक्रियता अधिक है। इसके व्यवहार का अध्ययन कर रेडियो कॉलर से निगरानी की जाएगी।

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भालू से बचने के लिए भागी दो महिलाओं की हो गई थी मौत

पोखरी ब्लाॅक में बीते तीन सितंबर को नेल गांव के सिदेली तोक में जंगल में घास लेने गई दो महिलाएं भालू से बचने के लिए भागते वक्त खाई में जा गिरी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वर्ष 2025 के दिसंबर माह में भालू राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिशंकर में घुस गया था, जिसमें दो छात्र घायल हो गए थे। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्र में भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगाया गया, मगर उसकी दहशत कम नहीं हुई।

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