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Chamoli News: ‘बाबा मोहन उत्तराखंडी का बलिदान हमेशा रहेगा याद’
Wed, 09 Aug 2023 05:38 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Wed, 09 Aug 2023 05:38 PM IST
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फोटो
रंगारंग कार्यक्रमों के साथ बेनीताल में दो दिवसीय शहीद स्मृति मेला शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। बाबा मोहन उत्तराखंडी की स्मृति में कर्णप्रयाग तहसील के बेनीताल में दो दिवसीय शहीद स्मृति मेला रंगारंग कार्यक्रमों के साथ शुरू हो गया। इस दौरान बाबा मोहन को सैकड़ों लोगों ने श्रद्धांजलि दी और उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया गया। कहा गया कि बाबा मोहन उत्तराखंडी का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। इस दौरान स्कूली बच्चों, महिला व युवक मंगल दलों ने लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।
बुधवार को मेले का उद्घाटन करते हुए हिमाद्री संस्था के संस्थापक डॉ. दरबान सिंह पुंडीर ने कहा कि बाबा मोहन उत्तराखंडी का बलिदान हमेशा युगों-युगों तक रखा जाएगा। कहा कि राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग के लिए बाबा मोहन उत्तराखंडी 38 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे और अपने प्राणों की आहुति दी थी। बाबा मोहन आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी जिंदादिली और पहाड़ के लिए विकास की सोच हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। मेले में धारकोट, सिमतोली, घंडियाल, रतूड़ा, खंडूड़ा, रंडोली, तोप, सेम, कर्णप्रयाग से सैकड़ों लोग पहुंचे। खराब मौसम के बावजूद मेले में देर शाम तक मेलार्थी कार्यक्रम देखने के लिए पंडाल में बैठे रहे। मेले में लोगों ने जलेबी, मिठाई और पहाड़ी उत्पादों का आनंद लिया। इस मौके पर मेला अध्यक्ष मगन सिंह, सचिव बीरेंद्र मिंगवाल, यशपाल कठैत, राकेश कोटियाल, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह, हरेंद्र चौधरी, समीर मिश्रा, धीरेंद्र भंडारी, डॉ. मदन मोहन नौनी और पदम नेगी आदि मौजूद रहे।
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रंगारंग कार्यक्रमों के साथ बेनीताल में दो दिवसीय शहीद स्मृति मेला शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। बाबा मोहन उत्तराखंडी की स्मृति में कर्णप्रयाग तहसील के बेनीताल में दो दिवसीय शहीद स्मृति मेला रंगारंग कार्यक्रमों के साथ शुरू हो गया। इस दौरान बाबा मोहन को सैकड़ों लोगों ने श्रद्धांजलि दी और उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया गया। कहा गया कि बाबा मोहन उत्तराखंडी का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। इस दौरान स्कूली बच्चों, महिला व युवक मंगल दलों ने लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।
बुधवार को मेले का उद्घाटन करते हुए हिमाद्री संस्था के संस्थापक डॉ. दरबान सिंह पुंडीर ने कहा कि बाबा मोहन उत्तराखंडी का बलिदान हमेशा युगों-युगों तक रखा जाएगा। कहा कि राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग के लिए बाबा मोहन उत्तराखंडी 38 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे और अपने प्राणों की आहुति दी थी। बाबा मोहन आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी जिंदादिली और पहाड़ के लिए विकास की सोच हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। मेले में धारकोट, सिमतोली, घंडियाल, रतूड़ा, खंडूड़ा, रंडोली, तोप, सेम, कर्णप्रयाग से सैकड़ों लोग पहुंचे। खराब मौसम के बावजूद मेले में देर शाम तक मेलार्थी कार्यक्रम देखने के लिए पंडाल में बैठे रहे। मेले में लोगों ने जलेबी, मिठाई और पहाड़ी उत्पादों का आनंद लिया। इस मौके पर मेला अध्यक्ष मगन सिंह, सचिव बीरेंद्र मिंगवाल, यशपाल कठैत, राकेश कोटियाल, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह, हरेंद्र चौधरी, समीर मिश्रा, धीरेंद्र भंडारी, डॉ. मदन मोहन नौनी और पदम नेगी आदि मौजूद रहे।
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