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ग्वाड़ के जंगल में एक महीने बाद फिर लगी आग, सैकड़ों बांज बुरांश के पेड़-पौधे जले
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कपीरी पट्टी के ग्वाड़ गांव के जंगल में लगी आग।
- फोटो : KARNPRYAG
कपीरी पट्टी में ग्वाड़ गांव के जंगल में लगी आग से सैकड़ों बांज, बुरांश व काफल के पौधे जल गए। गांव के लोगों, राइंका कनखुल के एनसीसी कैडेट्स और शिक्षकों ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद आग बुझाई, लेकिन दोपहर में तेज हवाएं चलने से फिर जंगल में आग भड़क गई। इससे पहले नौ मार्च को भी पास के जंगल में असामाजिक तत्वों ने आग लगाई थी, जिसमें सैकड़ों बांज व बुराश के पेड़-पौधे जल गए थे।
ग्वाड़ निवासी व शिक्षक जगदीश कंडवाल बताया कि उनके गांव की सीमा के अंतर्गत चौड़ी पत्ती वाले पेड़-पौधों का जंगल है। ग्रामीण खुद जंगल इस की रक्षा करते है। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार रात को असामाजिक तत्वों ने जंगल में आग लगा दी। रात में ही गांव के लोग आग बुझाने पहुंचे, लेकिन आग नहीं बुझ पाई। इस पर शुक्रवार सुबह फिर ग्रामीण व कनखुल इंटर कॉलेज के एनसीसी कैडेट्स आग बुझाने पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझा दी, लेकिन दोपहर में फिर हवा चलने से आग भड़क गई। कहा कि वन विभाग को सूचना दी गई लेकिन वहां से कोई आग बुझाने नहीं पहुंचा। ग्रामसभा ग्वाड़ की पूर्व प्रधान संगीता कंडवाल ने बताया कि असामाजिक तत्व अपने निजी स्वार्थ के लिए वनों को आग लगा रहे हैं, जो चिंतनीय है। जीव विज्ञान प्रवक्ता डॉ. जगदीश कंडवाल ने कहा कि इस वन क्षेत्र में वन संपदा को बहुत क्षति हुई है। आग बुझाने में राजेंद्र कंडवाल, रिद्धिमा, वर्षा, संदिली आदि ने सहयोग किया।
दो दिन से जल रहे लाखी गांव के जंगल
लाखी का कई हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ गया। पिछले दो दिनों से यहां जंगल धधक रहा है। शुक्रवार को भी दिनभर जंगल में आग लगी रही। आग लगने से भारी मात्रा में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। आग से कई हेक्टेयर जंगल जल चुका है और दर्जनों बांज, बुरांस और चीड़ के पेड़ जल चुके हैं। आग तेजी से जंगल में फैलती जा रही है।
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नंदानगर के पास लाखी के नखुना और कोपटरा के जंगल में लगी आग लगातार विकराल होती जा रही है। जंगल के चारों ओर धुएं की लपटें उठ रही हैं। दो दिन से लगी आग से जंगल का काफी हिस्सा जल चुका है। घने जंगल में लगी आग से वन्य जीवों को भी खतरा पैदा हो गया है। आग से चारों ओर धुंध छा गई है। यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो क्षेत्र का पूरा जंगल जल जाएगा। स्थानीय लोगों ने जंगल में आग लगने की सूचना वन विभाग को दे दी है, लेकिन शाम तक वन विभाग से कोई आग बुझाने नहीं पहुंचा था। इधर, बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश कुमार दुबे का कहना है कि सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर भेज दी गई है। जल्द ही आग पर काबू पा लिया जाएगा। संवाद
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ग्वाड़ निवासी व शिक्षक जगदीश कंडवाल बताया कि उनके गांव की सीमा के अंतर्गत चौड़ी पत्ती वाले पेड़-पौधों का जंगल है। ग्रामीण खुद जंगल इस की रक्षा करते है। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार रात को असामाजिक तत्वों ने जंगल में आग लगा दी। रात में ही गांव के लोग आग बुझाने पहुंचे, लेकिन आग नहीं बुझ पाई। इस पर शुक्रवार सुबह फिर ग्रामीण व कनखुल इंटर कॉलेज के एनसीसी कैडेट्स आग बुझाने पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझा दी, लेकिन दोपहर में फिर हवा चलने से आग भड़क गई। कहा कि वन विभाग को सूचना दी गई लेकिन वहां से कोई आग बुझाने नहीं पहुंचा। ग्रामसभा ग्वाड़ की पूर्व प्रधान संगीता कंडवाल ने बताया कि असामाजिक तत्व अपने निजी स्वार्थ के लिए वनों को आग लगा रहे हैं, जो चिंतनीय है। जीव विज्ञान प्रवक्ता डॉ. जगदीश कंडवाल ने कहा कि इस वन क्षेत्र में वन संपदा को बहुत क्षति हुई है। आग बुझाने में राजेंद्र कंडवाल, रिद्धिमा, वर्षा, संदिली आदि ने सहयोग किया।
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दो दिन से जल रहे लाखी गांव के जंगल
लाखी का कई हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ गया। पिछले दो दिनों से यहां जंगल धधक रहा है। शुक्रवार को भी दिनभर जंगल में आग लगी रही। आग लगने से भारी मात्रा में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। आग से कई हेक्टेयर जंगल जल चुका है और दर्जनों बांज, बुरांस और चीड़ के पेड़ जल चुके हैं। आग तेजी से जंगल में फैलती जा रही है।
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नंदानगर के पास लाखी के नखुना और कोपटरा के जंगल में लगी आग लगातार विकराल होती जा रही है। जंगल के चारों ओर धुएं की लपटें उठ रही हैं। दो दिन से लगी आग से जंगल का काफी हिस्सा जल चुका है। घने जंगल में लगी आग से वन्य जीवों को भी खतरा पैदा हो गया है। आग से चारों ओर धुंध छा गई है। यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो क्षेत्र का पूरा जंगल जल जाएगा। स्थानीय लोगों ने जंगल में आग लगने की सूचना वन विभाग को दे दी है, लेकिन शाम तक वन विभाग से कोई आग बुझाने नहीं पहुंचा था। इधर, बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश कुमार दुबे का कहना है कि सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर भेज दी गई है। जल्द ही आग पर काबू पा लिया जाएगा। संवाद