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वैकल्पिक रास्ते बहे, स्कूल जाना बंद
Chamoli
Updated Thu, 31 Jul 2014 05:31 AM IST
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थराली। तहसील के काफलघट तथा फरसोगाड़ गांव के 15 से अधिक छात्र-छात्राएं तीन हफ्तों से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो यहां अब आवाजाही की वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी बंद हो गई हैं। बारिश के कारण गदेरे उफान पर हैं। दोनों गांवों के बच्चे राजकीय प्राथमिक विद्यालय और कन्या जूनियर हाईस्कूल चिडि़ंगा मल्ला सहित हाईस्कूल सरकोट में पढ़ने जाते हैं। वहीं इंटर की पढ़ाई करने के लिए ग्वालदम जाने वाले छात्र भी जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं।
जून 2013 में आई आपदा से ग्वालदम से चिडि़ंगा तक ग्वाई गदेरे में बनी पांच पुलिया बह र्गइं थीं साथ ही काफलघट और फरसोगाड़ को जोड़ने वाले रास्ते भी गदेरों के उफान में बह गए थे। वहीं ग्वालदम से थराली और नंदकेशरी पैदल मार्ग भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन एक वर्ष बाद भी यहां न पुलिया बनी और न रास्ताें का निर्माण हुआ। इस बार की बारिश से गदेरे फिर उफान पर आए तो आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था भी बंद हो गईं। ऐसे में काफलघट और फरसोगाड़ गांवों के बच्चे तीन हफ्तों से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। काफलगढ़ के मोहन चंद्र का कहना है कि अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग के जेई मनोज कुमार कोटला का कहना है कि पैदल रास्ते के निर्माण का कार्य ठेकेदार को दिया गया है, जबकि पुलिया का निर्माण धन की कमी के कारण नहीं हो पा रहा है।
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जून 2013 में आई आपदा से ग्वालदम से चिडि़ंगा तक ग्वाई गदेरे में बनी पांच पुलिया बह र्गइं थीं साथ ही काफलघट और फरसोगाड़ को जोड़ने वाले रास्ते भी गदेरों के उफान में बह गए थे। वहीं ग्वालदम से थराली और नंदकेशरी पैदल मार्ग भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन एक वर्ष बाद भी यहां न पुलिया बनी और न रास्ताें का निर्माण हुआ। इस बार की बारिश से गदेरे फिर उफान पर आए तो आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था भी बंद हो गईं। ऐसे में काफलघट और फरसोगाड़ गांवों के बच्चे तीन हफ्तों से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। काफलगढ़ के मोहन चंद्र का कहना है कि अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग के जेई मनोज कुमार कोटला का कहना है कि पैदल रास्ते के निर्माण का कार्य ठेकेदार को दिया गया है, जबकि पुलिया का निर्माण धन की कमी के कारण नहीं हो पा रहा है।
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