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250 दंपतियों ने किया संतान प्राप्ति के लिए तप

Sat, 18 Dec 2021 07:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 18 Dec 2021 07:24 PM IST
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250 couples did penance to get children
मंडल में अपने भक्तों को दर्शन देतीं मां भगवती की डोली। - फोटो : GOPESHWAR
दो दिवसीय अनसूया माता मेला शनिवार को संपन्न हो गया। इस बार करीब 250 दंपतियों ने माता अनसूया के मंदिर में तप कर संतान की कामना की। दंपतियों ने रातभर मंदिर में तप किया और शनिवार सुबह माता के दर्शन के लिए अपने-अपने गंतव्य को रवाना हुए। दूर-दराज के क्षेत्रों से अनसूया माता मंदिर पहुंचे भक्तगणों ने माता अनसूया के दर्शन कर परिवार की कुशलता की कामना की। अनसूया मंदिर में दो दिनों तक भक्तों का तांता लगा रहा।
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शुक्रवार देर शाम बणद्वारा गांव की ज्वाला देवी, देवलधार की ज्वाल्पा देवी, खल्ला गांव से अनसूया माता की रथ डोली, कठूड़ से मां भगवती और सगर गांव से मां भगवती की डोलियां पांच किलोमीटर पैदल चलकर मां अनसूया के मंदिर में पहुंचीं। मंदिर परिसर में देव डोलियों के अद्भुत मिलन को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मंदिर में पहुंचे हुए थे। देव डोलियों की विधि-विधान से पूजा हुई। इसके बाद मंदिर के सभा मंडप में बरोहियों (संतान प्राप्ति के पहुंचे दंपती) को बैठाया गया। इस वर्ष 250 बरोहियों ने तप के लिए पंजीकरण करवाया था। रातभर बरोहियों ने मंदिर के सभा मंडप में माता अनसूया का जप किया। शनिवार को सुबह मां अनसूया के साथ ही विभिन्न गांवों से पहुंचीं देव डोलियों की विशेष पूजाएं हुईं। दोपहर बाद मंदिर में हवन किया गया, जिसके बाद मां अनसूया से विदा लेकर देव डोलियां अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हुईं। साथ ही भक्त भी अपने गंतव्य को गए। मंदिर समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह राणा, सचिव दिगंबर सिंह बिष्ट और पूर्व प्रमुख भगत सिंह बिष्ट का कहना है कि कड़ाके की ठंड के बावजूद मां अनसूया मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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पांच किमी मीटर चढ़ाई पारकर मंदिर पहुंचे दिव्यांग सुरेंद्र
गोपेश्वर। दोनों पांवों से दिव्यांग एक भक्त पांच किलोमीटर की चढ़ाई को पार कर माता अनसूया के मंदिर में पहुंचा। इस भक्त की अटूट आस्था को देख अन्य भक्तगण भी नतमस्तक हो गए। माता अनसूया का मंदिर घने जंगल के बीच स्थित है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी दिव्यांग कर्णप्रयाग निवासी सुरेंद्र हाथों के बल पर पांच किलोमीटर की पैदल चढ़ाई पार कर मंदिर में पहुंचा। सुरेंद्र का कहना है कि वह अनसूया मंदिर तक पहुंचने के लिए कई बार प्रयास कर चुका है, लेकिन विफल रहा। इस बार कठिन परिस्थितियों के बीच माता अनसूया के मंदिर में पहुंचा तो अपने को धन्य महसूस कर रहा हूं। माता रानी से घर-परिवार की कुशलता की मनौतियां मांगी। संकल्प अभियान के संयोजक मनोज तिवारी का कहना है कि मां अनसूया वरदानी देवी हैं। माता के मंदिर में शांति और सुकून की अनुभूति होती है।
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