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महिलाओं ने चौंफुला, चांछरी गीतों की प्रस्तुति दी
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आदिबदरी (चमोली)। आदिबदरी में तीन दिवसीय नौठा कौथिग का सोमवार को समापन हो गया। इस दौरान भगवान आदिबदरीनाथ को नया अनाज चढ़ाने के लिए ग्रामीणों के बीच प्रतीकात्मक युद्ध हुआ। युद्ध देखने के लिए भारी संख्या में लोग आदिबदरी पहुंचे थे।
परंपरा के अनुसार सोमवार को करीब एक बजे गाजे-बाजे और देव डोली के साथ खेती, रंडोली गांव के ग्रामीण मालगुजार गुलाब सिंह के नेतृत्व में लाठी-डंडों के साथ आदिबदरी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचे। विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने खेती गांव के मालगुजार को सरज की काली टोपी पहनाकर रेशमी म्यान वाली तलवार भेंट की। मेला समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी ने फूल मालाओं से खेती और रंडोली गांव के ग्रामीणों का स्वागत किया। मंदिर परिसर में ग्रामीणों के प्रवेश के साथ ही ढोल दमाऊं की थाप पर युद्ध की रणभेरी बजते ही ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ दो दलों में बंट गए। भगवान को नया अनाज चढ़ाने के लिए ग्रामीणों के बीच लाठी-डंडों का प्रतीकात्मक युद्ध शुरू हुआ। एक घंटे तक चले प्रतीकात्मक युद्ध के बाद दोनों दलों ने आपस में गले मिलकर भगवान आदिबदरी की सामूहिक पूजा करके नए अनाज का भोग लगाया।
कौथिग में छिमटा, रंडोली, भलसों और खेती की महिलाओं ने धार्मिक लोक गीत, चौंफुला, चांछरी गीतों की प्रस्तुति दी। अल्मोड़ा के कलाकारों ने ‘रामी बोराणी’ गीत नाटिका और हीरा समध्यैंणी लोक नृत्य प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि विधायक एसएस नेगी ने पुरस्कार वितरित किए। उन्होंने मेला कमेटी के कार्यों की सराहना की। कमेटी के अध्यक्ष नवानी ने विधायक को स्मृति चिह्न भेंट किया। इस मौके पर पूर्व मुख्य सचिव पीके मोहंती, परिणति मोहंती, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सदस्य डॉ. प्रकाश थपलियाल, बीकेटीसी सदस्य अरुण मैठाणी, दिनेश पंवार, विनोद नेगी, नरेंद्र चाकर, नरेश बरमोला, गैंणा सिंह, नवीन बहुगुणा मौजूद थे।
परंपरा के अनुसार सोमवार को करीब एक बजे गाजे-बाजे और देव डोली के साथ खेती, रंडोली गांव के ग्रामीण मालगुजार गुलाब सिंह के नेतृत्व में लाठी-डंडों के साथ आदिबदरी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचे। विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने खेती गांव के मालगुजार को सरज की काली टोपी पहनाकर रेशमी म्यान वाली तलवार भेंट की। मेला समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी ने फूल मालाओं से खेती और रंडोली गांव के ग्रामीणों का स्वागत किया। मंदिर परिसर में ग्रामीणों के प्रवेश के साथ ही ढोल दमाऊं की थाप पर युद्ध की रणभेरी बजते ही ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ दो दलों में बंट गए। भगवान को नया अनाज चढ़ाने के लिए ग्रामीणों के बीच लाठी-डंडों का प्रतीकात्मक युद्ध शुरू हुआ। एक घंटे तक चले प्रतीकात्मक युद्ध के बाद दोनों दलों ने आपस में गले मिलकर भगवान आदिबदरी की सामूहिक पूजा करके नए अनाज का भोग लगाया।
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कौथिग में छिमटा, रंडोली, भलसों और खेती की महिलाओं ने धार्मिक लोक गीत, चौंफुला, चांछरी गीतों की प्रस्तुति दी। अल्मोड़ा के कलाकारों ने ‘रामी बोराणी’ गीत नाटिका और हीरा समध्यैंणी लोक नृत्य प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि विधायक एसएस नेगी ने पुरस्कार वितरित किए। उन्होंने मेला कमेटी के कार्यों की सराहना की। कमेटी के अध्यक्ष नवानी ने विधायक को स्मृति चिह्न भेंट किया। इस मौके पर पूर्व मुख्य सचिव पीके मोहंती, परिणति मोहंती, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सदस्य डॉ. प्रकाश थपलियाल, बीकेटीसी सदस्य अरुण मैठाणी, दिनेश पंवार, विनोद नेगी, नरेंद्र चाकर, नरेश बरमोला, गैंणा सिंह, नवीन बहुगुणा मौजूद थे।
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