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तहसील अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर कलक्ट्रेट में धरने पर बैठा दंपति
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- फोटो : amarujala
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गोपेश्वर। मकान को क्षति पहुंचाने पर तहसील के अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने और क्षति की भरपाई की मांग के लिए पोखरी के एक दंपति ने कलक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। मांग को लेकर दंपति ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा।
पोखरी के प्रभावित फते सिंह ने डीएम को सौंपे ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2017 में आपदा से मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। जब सहायता के लिए तहसील अधिकारियों के पास गए तो तहसील अधिकारियों ने मयाणी तोक में मकान बनाने की मौखिक सहमति दी। यहां मकान के साथ ही शौचालय निर्माण कार्य भी पूरा कर दिया था, जिस पर पंद्रह लाख रुपये की लागत आई। 21 नवंबर 2018 को राजस्व विभाग ने तीन दिन में भूमि से निर्माण कार्य हटाने के लिखित आदेश दिए। जब तक कुछ समझ पाते 24 नवंबर को तहसील प्रशासन ने पुलिस बल के साथ मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने तहसील और राजस्व विभाग के अधिकारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप भी लगाया। इधर, अपर जिलाधिकारी एमएस बर्निया ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा उसी के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर पोखरी तहसीलदार आरके सुयाल का कहना है कि उक्त व्यक्ति की ओर से राज्य सरकार की भूमि पर मकान बनाया गया था। अवैध निर्माण को हटाने के बाद आक्रोश में आकर तहसील और राजस्व अधिकारियों के खिलाफ गलत बयानबाजी की जा रही है। उक्त व्यक्ति की ओर से अधिकारियों पर लगाया जा रहा रिश्वत लेने का आरोप बेबुनियाद है।
पोखरी के प्रभावित फते सिंह ने डीएम को सौंपे ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2017 में आपदा से मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। जब सहायता के लिए तहसील अधिकारियों के पास गए तो तहसील अधिकारियों ने मयाणी तोक में मकान बनाने की मौखिक सहमति दी। यहां मकान के साथ ही शौचालय निर्माण कार्य भी पूरा कर दिया था, जिस पर पंद्रह लाख रुपये की लागत आई। 21 नवंबर 2018 को राजस्व विभाग ने तीन दिन में भूमि से निर्माण कार्य हटाने के लिखित आदेश दिए। जब तक कुछ समझ पाते 24 नवंबर को तहसील प्रशासन ने पुलिस बल के साथ मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने तहसील और राजस्व विभाग के अधिकारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप भी लगाया। इधर, अपर जिलाधिकारी एमएस बर्निया ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएगा उसी के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर पोखरी तहसीलदार आरके सुयाल का कहना है कि उक्त व्यक्ति की ओर से राज्य सरकार की भूमि पर मकान बनाया गया था। अवैध निर्माण को हटाने के बाद आक्रोश में आकर तहसील और राजस्व अधिकारियों के खिलाफ गलत बयानबाजी की जा रही है। उक्त व्यक्ति की ओर से अधिकारियों पर लगाया जा रहा रिश्वत लेने का आरोप बेबुनियाद है।
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