{"_id":"5d1a39f68ebc3e3c957a6686","slug":"15619998401-gopeshwar-news142","type":"story","status":"publish","title_hn":"संचार सेवा ठप होने से चौदह घंटे बाद मिली कार दुर्घटना की सूचना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संचार सेवा ठप होने से चौदह घंटे बाद मिली कार दुर्घटना की सूचना
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जोशीमठ। नीती घाटी में दो माह से संचार सेवा ठप होने के कारण मलारी मार्ग पर हुई कार दुर्घटना की सूचना प्रशासन को चौदह घंटे बाद मिली। यदि घाटी में संचार सेवा दुरुस्त होती तो रात को ही तत्काल खाई में गिरे युवकों को रेस्क्यू किया जा सकता था।
फरकिया गांव में क्रिकेट खेलने के बाद कोषा गांव के युवक कार से घर लौट रहे थे। रविवार शाम को सात बजे मलारी मार्ग पर भुजगड़ पर कार अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। युवकों के परिजन यह सोचकर खाना खाकर सो गए कि रात होने के कारण बच्चे फरकिया गांव में ही ठहर गए होंगे। जब सुबह तक भी वे नहीं पहुंचे तो उन्हें चिंता सताने लगी। रैणी गांव के लक्ष्मण बुटोला ने बताया कि जब युवकों के परिजनों ने भुजगड़ के पास सड़क किनारे कार के टायर और पत्थर छिटके देखे तो उन्हें अनहोनी का आभास हुआ। जब वे सड़क से खाई की ओर उतरे तो उन्हें वहां क्षतिग्रस्त कार के कुछ हिस्से मिले। परिजनों ने घटना की सूचना पुलिस को देना चाही लेकिन क्षेत्र में दो माह से सेटेलाइट फोन ठप पड़े हुए हैं। इस कारण पुलिस को सूचना देने के लिए उन्हें 30 किलोमीटर की दूरी तय कर सुरांईथोटा आना पड़ा और सोमवार को नौ बजे घटना की सूचना दे पाए। मेहरगांव के वन सरपंच धीरेंद्र गरोड़िया का कहना है कि नीती घाटी में बीएसएनएल की ओर से सेटेलाइट फोन वितरित किए गए थे जो डेड पड़े हैं। शिकायत के बाद भी संचार सेवा सुचारु नहीं की जा रही है। यदि संचार सेवा सुचारु रहती तो कार दुर्घटना की सूचना रात को ही मिल जाती और ग्रामीण तत्काल रेस्क्यू शुरू कर देते। इस दुर्घटना से नीती घाटी में शोक की लहर है।
इंसेट
ड्रोन कैमरा और डॉग स्क्वॉड की मदद से किया रेस्क्यू
गोपेश्वर। हादसे की सूचना मिलने के बाद कार खोजने के लिए आपदा प्रबंधन दल ने ड्रोन कैमरे की मदद ली। कैमरे और डॉग स्क्वॉड (खोजी कुत्ते) की मदद से खाई में गिरे युवकों का रेस्क्यू किया गया।
फरकिया गांव में क्रिकेट खेलने के बाद कोषा गांव के युवक कार से घर लौट रहे थे। रविवार शाम को सात बजे मलारी मार्ग पर भुजगड़ पर कार अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। युवकों के परिजन यह सोचकर खाना खाकर सो गए कि रात होने के कारण बच्चे फरकिया गांव में ही ठहर गए होंगे। जब सुबह तक भी वे नहीं पहुंचे तो उन्हें चिंता सताने लगी। रैणी गांव के लक्ष्मण बुटोला ने बताया कि जब युवकों के परिजनों ने भुजगड़ के पास सड़क किनारे कार के टायर और पत्थर छिटके देखे तो उन्हें अनहोनी का आभास हुआ। जब वे सड़क से खाई की ओर उतरे तो उन्हें वहां क्षतिग्रस्त कार के कुछ हिस्से मिले। परिजनों ने घटना की सूचना पुलिस को देना चाही लेकिन क्षेत्र में दो माह से सेटेलाइट फोन ठप पड़े हुए हैं। इस कारण पुलिस को सूचना देने के लिए उन्हें 30 किलोमीटर की दूरी तय कर सुरांईथोटा आना पड़ा और सोमवार को नौ बजे घटना की सूचना दे पाए। मेहरगांव के वन सरपंच धीरेंद्र गरोड़िया का कहना है कि नीती घाटी में बीएसएनएल की ओर से सेटेलाइट फोन वितरित किए गए थे जो डेड पड़े हैं। शिकायत के बाद भी संचार सेवा सुचारु नहीं की जा रही है। यदि संचार सेवा सुचारु रहती तो कार दुर्घटना की सूचना रात को ही मिल जाती और ग्रामीण तत्काल रेस्क्यू शुरू कर देते। इस दुर्घटना से नीती घाटी में शोक की लहर है।
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ड्रोन कैमरा और डॉग स्क्वॉड की मदद से किया रेस्क्यू
गोपेश्वर। हादसे की सूचना मिलने के बाद कार खोजने के लिए आपदा प्रबंधन दल ने ड्रोन कैमरे की मदद ली। कैमरे और डॉग स्क्वॉड (खोजी कुत्ते) की मदद से खाई में गिरे युवकों का रेस्क्यू किया गया।
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