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पिंडरघाटी के भेड़ पालकों ने की सरकारी मदद की मांग
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देवाल। सरकार की बेरुखी के कारण पिंडर घाटी के भेड़ पालक ऊन का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण मायूस हैं। ग्रामीण धीरे-धीरे भेड़ पालन का व्यवसाय छोड़ रहे हैं। ऐसे में युवा रोजगार की तलाश में गांवों से पलायन कर रहे हैं। सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिलने पर भेड़ पालकों ने ऊन बुग्यालों में फेंक दी है। उन्होंने सरकार से भेड़ पालकों को ऊन का उचित मूल्य दिलाने की मांग की।
देवाल ब्लॉक के हिमालयी क्षेत्र के वाण, कुलिंग, मुंदोली, बलाड़, घेस, पिनाऊं, हिमनी, वांक आदि गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय भेड़-बकरी पालन के साथ खेती भी है। वाण गांव के भेड़-बकरी पालक इंद्र सिंह, खड़क सिंह, नरेंद्र सिंह, महिपाल आदि ने कहा कि क्षेत्र के वेदनी, आली, बगजी, नवाली बुग्यालों में भेड़ पालक छानियों में रहते हैं। दो दशक पूर्व इन बुग्यालों में 50 हजार से अधिक बकरियां होती थीं, लेकिन अब अधिकांश लोगों ने भेड़ पालन का व्यवसाय छोड़ दिया है और क्षेत्र के बुग्यालों में बकरियों की संख्या पांच हजार से भी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि ऊन का उचित मूल्य दिलाने के लिए जल्द सरकार मदद करे ताकि ग्रामीणों का व्यवसाय चल सके।
देवाल ब्लॉक के हिमालयी क्षेत्र के वाण, कुलिंग, मुंदोली, बलाड़, घेस, पिनाऊं, हिमनी, वांक आदि गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय भेड़-बकरी पालन के साथ खेती भी है। वाण गांव के भेड़-बकरी पालक इंद्र सिंह, खड़क सिंह, नरेंद्र सिंह, महिपाल आदि ने कहा कि क्षेत्र के वेदनी, आली, बगजी, नवाली बुग्यालों में भेड़ पालक छानियों में रहते हैं। दो दशक पूर्व इन बुग्यालों में 50 हजार से अधिक बकरियां होती थीं, लेकिन अब अधिकांश लोगों ने भेड़ पालन का व्यवसाय छोड़ दिया है और क्षेत्र के बुग्यालों में बकरियों की संख्या पांच हजार से भी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि ऊन का उचित मूल्य दिलाने के लिए जल्द सरकार मदद करे ताकि ग्रामीणों का व्यवसाय चल सके।
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